कैसे बनेगी 2020 तक 100 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा

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नई दिल्ली। भारत ने हालांकि 2020 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है, लेकिन जानकार इस लक्ष्य को लेकर शक जाहिर कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में निजी निवेश सबसे बड़ी बाधा है। दूसरी तरफ सरकार का मानना है कि वह इस लक्ष्य को लेकर पूरी तरह से सजग है और इसे पा लिया जाएगा।
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को अगले छह सालों में निश्चित रूप से 130.76 गीगावॉट सालाना स्थापित करना होगा, जोकि साल 2016 में स्थापित की गई क्षमता का तीन गुणा है। भारत के लिए इस लक्ष्य को पाना ग्लोबल वार्मिग को कम करने के लिए बेहद जरूरी है। साल 2100 तक धरती का तापमान औसतन 1.8 डिग्री सेल्सियस से लेकर 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
पेरिस समझौता
2015 में पेरिस समझौते के माध्यम से साल 2100 तक धरती के तापमान में 2 डिग्री की कमी करने पर वैश्विक सहमति बनी थी। करीब 162 देशों ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान का इरादा (आईएनडीसी) दाखिल किया। इन देशों में भारत भी शामिल है। समझौते के दस्तावेजों में ग्लोबल वार्मिग से निपटने के लिए इन देशों को विभिन्न कदम उठाने के उपाय वर्णित थे। आईएनडीसी के हिस्से के तौर पर भारत ने 2030 तक अपनी कुल बिजली का 40 फीसदी गैर जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2016 में भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में अक्षय ऊर्जा का योगदान 15 फीसदी था, जबकि अगस्त 2015 में यह 13.1 फीसदी था।
लक्ष्य ज्यादा ही बड़े
सिंपा एनर्जी नेटवर्क छोटे ऊर्जा ग्रिड बनाती है, जिससे कुछ घरों या गांवों को बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसके मुख्य वित्तीय अधिकारी पीयूष माथुर का कहना है कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हो रहे हैं कि घर में बिना ग्रिड से कनेक्ट हुए भी वैकल्पिक स्रोतों से बिजली की आपूर्ति की जा सकती है। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करनेवाली कनाडा की गैर लाभकारी संस्था इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बिजली क्षेत्र की विशेषज्ञ विभूति गर्ग का कहना है कि भारत का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य अत्यधिक आशावादी है, जबकि यर्थाथपरक नहीं है।
निवेश की दिक्कत
नई दिल्ली की एक शोध संस्था काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी अभिषेक जैन का कहना है कि सबसे बड़ी रुकावट वित्त पोषण है। अगर वित्त पोषण प्राप्त कर लिया जाता है तो लक्ष्य भी प्राप्त हो जाएगा।
सुजलान की राय
पूणे की सुजलान समूह ने भारत में 9.8 गीगावॉट का पवन ऊर्जा संयंत्र लगाया है। इसके अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तुलसी तांती का कहना है कि भारतीय अक्षय ऊर्जा स्त्रोत को वित्त पोषण आमंत्रित करने के लिए आर्कषक बनाने की जरूरत है। बैंक और वित्तीय संस्थान अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं का कम से कम 20 फीसदी अनुदान दे सकते हैं।

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