IPL
IPL

कौथिग 2016 में दिखी पहाड़ की संस्कृति और सभ्यता

मुंबई। प्रवासी उत्तराखंडियों के लिये हर साल की तरह इस बार भी कौथिग 2016 का आयोजन हुआ। नवी मुंबई के रामलीला मैदान में आयोजित उत्तराखण्ड महोत्सव कौथिग में राज्य के लोगों के साथ ही अन्य लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रवासी उत्तराखंडियों का उत्साह बढ़ाने के लिए कौथिग 2016 में मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद उनके बीच पहुंचे।

ये भी पढ़ें – उत्तराखंड के इन नजारों के बीच अब लाइट-कैमरा-एक्शन

कौथिंग 2016 2

कौथिग 2016 के जरिए विकास में भागीदारी की अपील

मुंबई में बीते कई सालों से रह रहे उत्तराखंड के लोगों द्वारा आयोजित कौथिग में पहाड़ की संस्कृति और सभ्यता की अद्भुत झलक देखने को मिली। इस कार्यक्रम में एक ओर जहां उत्तराखण्ड के रहने वाले बड़े उद्यमियों ने शिरकत की, वहीं दूसरी ओर फिल्म कलाकार हेमंत पांडे और अन्य लोग भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में खासतौर पर भाग लेने के लिए दून से मुंबई पहुंचे सीएम हरीश रावत ने प्रवासी उत्तराखंडियों की खुले दिल से जमकर तारीफ की। सीएम के साथ इस कार्यक्रम में पीसीसी अध्‍यक्ष किशोर उपाध्याय और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत भी मौजूद रहे। इस मौके पर सीएम रावत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हिटो पहाड़ हिटो गांव भावना से प्रवासी उत्तराखंडियों को राज्य के विकास में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें – उत्तराखंड में Fresh Snowfall से बढ़ी ठंड

कौथिंग 2016 3

सीएम ने ये भी कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप गांव की आधारभूत संरचना को मजबूत करते हुए ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। सुविधा संपन्न गांव ही समृद्ध पहाड़ का मजबूत आधार बनेंगे। सीएम ने जोर देते हुए कहा कि फूलदेई त्यौहार को भी राज्य पुष्प दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

ये भी पढ़ें – बेरोजगार बढ़ रहे उत्तराखंड में

कौथिंग 2016 4

चटख रंगों में दिखे पहाड़ के अद्भुत और विभिन्न नजारे

मुंबई में उत्तराखंड कौथिग-2016 में दूरदराज से आए लोगों को प्रीतिमा वत्स की पेंटिग्स में अपने घरों की याद आई, जो उन्होंने पहाड़ शृंखला के तहत बनाई हैं। बता दें कि दिल्ली की चित्रकार प्रीतिमा वत्स की पेंटिंग प्रदर्शनी भी मुंबई कौथिग में चल रही है। अपने रिश्तों की खनक को चटख रंगों में प्रवासी उत्तराखंडियों ने भी गहराई से महसूस किया जो चाहते हुए भी कई सालों से पहाड़ नहीं जा सके हैं।

ये भी पढ़ें – उत्तराखंड में बढ़ गये जमीन के दाम, सर्किल रेट 80% तक बढ़े

कौथिंग 2016 5

पहाड़ का चिपको आंदोलन हो, 2013 में आई प्राकृतिक तबाही, पर्यावरण संरक्षण हो या पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने की कोशिश, ये सभी रंग इन पेंटिग्स में खिलते नजर आए। इन चित्रों में पहाड़ों की संवेदना भी देखने को मिलती है। मौजूदा समय में जब जल,जंगल और जमीन को बचाने की कोशिशें हर स्तर पर हो रही हैं तब ये चित्र उस लौ को और भी तेज करते दिख रहे हैं।

अपनी कला यात्रा के बारे में प्रीतिमा कहती हैं कि पहाड़ की लगातार यात्राओं ने मुझे वहां की सांस्कृतिक अस्मिता को करीब से महसूस करने का मौका दिया। अब तो पहाड़ घर की तरह लगता है। उन्होंने कहा कि उनके लिये पहाड़ का मतलब है जिजीविषा की पूजा।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button