क्या है जन्माष्टमी के दिन दही हांडी उत्सव मनाने का महत्व, जानिए इस रिपोर्ट में

नई दिल्ली. भगवान  श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाए जाना वाला त्योहार जन्माष्टमी को आने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी मनाई जाती है। जन्माष्टमी के इस त्योहार को  पूरे देश में बड़ी धूमधाम और हर्ष के साथ मनाया जाता है। इस दिन तरह-तरह की झांकियों के साथ दही हांडी उत्सव को भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दही हांडी का इस दिन एक खास महत्व है।

साल 2020 में जन्माष्टमी का यह त्योहार 12 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा। लेकिन देश में कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के चलते सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस साल जन्माष्टमी पर दही दांडी का उत्सव  नहीं मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के दिन दही हांडी का उत्सव  मनाने का भी एक खास महत्व है।

 शास्त्रों में बताया गया है कि, भगवान कृष्ण को दही और मक्खन काफी पसंद था।अपने  बचपन में भगवान श्री कृष्ण गोपियों की मटकियां फोड़कर उनमें से मख्खन चुरा कर खाते थे। जिसकी  वजह से गोपियां कृष्ण जी से परेशान होकर उनकी शिकायत यशोदा माता से करती थीं। लेकिन माता यशोदा के समझाने का भी बाल गोपाल पर कोई असर नहीं होता था। मानयता के अनुसार गोपियां अपने दही को भगवान श्रीकृष्ण से बचाने के लिए दही की मटकी को ऊंचाई पर टांग देती थीं।

मगर इसके बावजूद कन्हैया ऊपर चढ़कर मटकियां फोड़कर उनके अंदर भरा दही या माखन चुरा कर खाते थे। श्रीकृष्ण की  इनहीं नटखट शरारतों की वजह से उनका नाम माखन चोर पड़ा।श्रीमद्भागवत दशम स्कंध में कृष्ण जन्म का उल्लेख मिलता है। जिसके मुताबिक, जिस समय पृथ्वी पर अर्धरात्रि में कृष्ण अवतरित हुए उस समय ब्रज में घनघोर बादल छाए थे।

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