#ChristmasDaySpecial : तैयार हो जाइए, तोहफों का झोला लेकर आ गए सेंटा

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क्रिसमस आ गया है। साथ ही लाल-सफेद कपड़ों में सफेद दाढ़ी और बालों वाला, कंधे पर गिफ्ट्स से भरा बड़ा बैग लटकाए, हाथों में क्रिसमस बेल लिए सेंटा भी। बच्चों के प्यारे सेंटा जिन्हें क्रिसमस फादर भी कहा जाता है। लेकिन कौन हैं सेंटा? और कहां हुआ इनका जन्‍म? आइए जानते हैं :-

क्रिसमस पर आने वाला कौन हैं सेंटा क्लॉज

माना जाता है कि सेंटा का घर उत्तरी ध्रुव में है और वे उड़ने वाले रेनडियर्स की गाड़ी पर चलते हैं। सेंटा का यह आधुनिक रूप 19वीं सदी से अस्तित्व में आया उसके पहले ये ऐसे नहीं थे। आज से डेढ़ हजार साल पहले जन्मे संत निकोलस को असली सेंटा और सेंटा का जनक माना जाता है। हालांकि संत निकोलस और जीसस के जन्म का कोई सीधा संबंध नहीं रहा फिर भी आज के समय में सेंटा क्लॉज क्रिसमस का अहम हिस्सा हैं। उनके बिना क्रिसमस अधूरा है।

कहां हुआ जन्‍म

‍संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी में जीसस की मौत के 280 साल बाद मायरा में हुआ। वे एक रईस परिवार से थे। उन्होंने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया। बचपन से ही उनकी प्रभु यीशु में बहुत आस्था थी। वे बड़े होकर ईसाई धर्म के पादरी (पुजारी) और बाद में ‍बिशप बने। उन्हें जरूरतमंदों और बच्चों को गिफ्‍ट्स देना बहुत अच्छा लगता था। वे अक्सर जरूरतमंदों और बच्चों को गिफ्ट्स देते थे।

रात में ही क्‍यों आते हैं सेंटा

संत निकोलस अपने उपहार आधी रात को ही देते थे क्योंकि उन्हें उपहार देते हुए नजर आना पसंद नहीं था। वे अपनी पहचान लोगों के सामने नहीं लाना चाहते थे। इसी कारण बच्चों को जल्दी सुला दिया जाता। आज भी कई जगह ऐसा ही होता है अगर बच्चे जल्दी नहीं सोते तो उनके सेंटा अंकल उन्हें उपहार देने नहीं आते हैं।

जब की एक महिला की मदद

संत निकोलस की दरियादिली की एक बहुत ही मशहूर कहानी है कि उन्होंने एक गरीब की मदद की। जिसके पास अपनी तीन बेटियों की शादी के लिए पैसे नहीं थे और मजबूरन वह उन्हें मजदूरी और देह व्यापार के दलदल में भेज रहा था। तब निकोलस ने चुपके से उसकी तीनों बेटियों की सूख रही जुराबों में सोने के सिक्कों की थैलियां रख दी और उन्हें लाचारी की जिंदगी से मुक्ति दिलाई। बस तभी से क्रिसमस की रात बच्चे इस उम्मीद के साथ अपने मोजे बाहर लटकाते हैं कि सुबह उनमें उनके लिए गिफ्ट्स होंगे।

कैसे निकोलस बनें संता

सेंटा का आज का जो प्रचलित नाम है वह निकोलस के डच नाम सिंटर क्लास से आया है। जो बाद में सेंटा क्लॉज बन गया। जीसस और मदर मैरी के बाद संत निकोलस को ही इतना सम्मान मिला। सन् 1200 से फ्रांस में 6 दिसम्बर को निकोलस दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। क्योंकि इस दिन संत निकोलस की मृत्यु हुई थी। अमेरिका में 1773 में पहली बार संता सेंट ए क्लॉज के रूप में मीडिया से रूबरू हुए।

आज के आधुनिक युग के सेंटा का अस्तित्व 1930 में आया। हैडन संडब्लोम नामक एक कलाकार कोका-कोला की एड में सेंटा के रूप में 35 वर्षों तक दिखाई दिया। सेंटा का यह नया अवतार लोगों को बहुत पसंद आया और आखिरकार इसे सेंटा का नया रूप स्वीकारा गया जो आज तक लोगों के बीच काफी मशहूर है। इस प्रकार धीरे-धीरे क्रिसमस और सेंटा का साथ गहराता चला गया और सेंटा पूरे विश्व में मशहूर होने के साथ-साथ बच्चों के चहेते बन गए।

सेंटा अपनी वाइफ और बहुत सारे बौनों के साथ उत्तरी ध्रुव में रहते हैं

आज भी ऐसा कहा जाता है कि सेंटा अपनी वाइफ और बहुत सारे बौनों के साथ उत्तरी ध्रुव में रहते हैं। वहां पर एक खिलौने की फैक्ट्री है जहां सारे खिलौने बनाए जाते हैं। सेंटा के ये बौने साल भर इस फैक्ट्री में क्रिसमस के ‍खिलौने बनाने के लिए काम करते हैं। आज विश्वभर में सेंटा के कई पते हैं जहां बच्चे अपने खत भेजते हैं, लेकिन उनके फिनलैंड वाले पते पर सबसे ज्यादा खत भेजे जाते हैं। इस पते पर भेजे गए प्रत्येक खत का लोगों को जवाब भी मिलता है। आप भी अपने खत सेंटा को इस पते पर भेज सकते हैं।

सेंटा का पता है:-

सेंटा क्लॉज,

सेंटा क्लॉज विलेज,

एफआईएन 96930 आर्कटिक सर्कल,

फिनलैंड

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