गंगा साफ-सफाई की निकली हवा

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इलाहाबाद। गंगा की साफ-सफाई के लिए केंद्र सरकार की तरफ से तमाम योजनाएं बनाई गई। योजनाएं कितनी फलीभूत हुईं इसका खुलासा संगम घाट पर हो रहा है। साफ तौर पर यह जाहिर हो रहा है कि गंगा की सफाई पर कितना अमल किया गया। साफ-सफाई योजना धरी की धरी रह गई। योजनाओं को लेकर जिला प्रशासन भी अपनी सक्रियता दिखाता रहा। गंगा की साफ साफाई पर समय-समय पर दिशा निर्देश भी जारी करता रहा जिला प्रशासन लेकिन नतीजा सिफर रहा।

Ganga

गंगा में गिर रहा नालों और सीवर का पानी

जिला प्रशासन के लाख मना करने के बावजूद शहर के नालों और सीवर का पानी अभी भी गंगा के खुले तौर पर गिर रहा है। पहले से गिर रहे नाले बंद नही हुए और कुछ नए नाले में गिरने शुरू हो गए। सबसे बड़ी बात यह है कि माघ मेले के दौरान हजारों कल्पवासी के साथ-साथ कुल ढ़ाई करोड़ लोगों की आने का आंकड़ा जिला प्रशासन की ओर से जारी किया गया है। इनके उपयोग की गई वस्तुएं भी संगम तीर पर ही प्रवाहित होती हैं। इसके लिए जिला प्रशासन के पास कोई योजना नही है। गंगा में पानी छोड़े जाने के बाद भी प्रदूषण का आलम यह है कि कहीं-कहीं तो प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से साधु संत नाराज चल रहे हैं।

बढ़ रहा प्रदूषण का मानक
गंगा में गिरते नाले की वजह से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। गंगा में बीओडी का मानक तीन मिलीग्राम प्रति लीटर है, लेकिन शास्त्री पुल के नीचे इसकी मात्रा कुछ ज्यादा है। सलोरी से नाले सहित एसटीपी का पानी गंगा में सीधे गिरता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक यहां बीओडी की मात्रा छह जनवरी तक 4.4 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है। संगम में यह चार मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि सलोरी नाले और एसटीपी से बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी सीधे गंगा में छोड़ा जा रहा है।

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