गजटेड अधिकारियों की सैलरी निकासी की काेई योजना नहीं

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रुपएराधेश्याम द्विवेदी।

नोटबंदी से कर्मचारियों के सैलरी व पेंशन निकासी में दिक्कतें आ रही है। महीने के अंतिम दिन से विभिन्न स्थानों पर कर्मचारियों को वेतन मिलना शुरू हो जाता है। इस दौरान सभी वेतनभोगी बैंकों व एटीएम से सबसे ज्यादा पैसों की निकासी करते हैं, ताकि अपनी रोजमर्रा की जरूरत के सामान व सेवाओं के लिए भुगतान कर सकें। बैंकों में और एटीएम से पैसे निकालने लिए लोगो को लंबी-लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए ही पहले मोदी सरकार फिर कई राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों को एडवांस में 10,000 रुपए नकद देनी की घोषणा की है, ताकि लोगों को परेशानी का सामना ना करना पड़े।

एडवांस बाद में नवबंर की सैलरी में एडजस्ट किया गया है। इसका फायदा सिर्फ नॉन गजटेड कर्मचारियों के लिए ही है। गजटेड अधिकारियों के सैलरी निकासी की कोइ योजना नहीं है। आरबीआई के प्रतिबंध व बैंक की बाध्यता की वजह से वेतन अकाउंट में आने के बाद भी लोग मनचाही निकासी नहीं कर पा रहे हैं । ऐसे में कर्मचारियों व पेंशनधारकों को परिवार का खर्च चलाने के लिए प्लान तैयार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को कुछ कार्य रोकने पड़ रहे हैं। कर्मचारियों ने नोटबंदी को सरकार का अच्छा कदम बताया, लेकिन अपने अकाउंट से निकासी की सीमा तय करने से परेशानी होने की भी बात कही। आरबीआई के प्रतिबंध व बैंक की निकासी सीमा की वजह से कर्मचारी व पेंशनर मनचाही रकम नहीं निकाल पा रहे हैं।

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जरूरत के मुताबिक नहीं मिल रही करेंसी:- आरबीआई के निर्देशों के अनुसार एक हफ्ते में 24 हजार रुपये निकाले जा सकते हैं, लेकिन बैंकों के पास इतना कैश भी नहीं मिल पा रहा है। कर्मचारियों को तनख्वाह कैश में निकालने में दिक्कतें आ रही है। बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सारा संकट नकदी की कम सप्लाई से है।अगर कैश की पूरी सप्लाई हो तो चार हफ्ते में खाता धारक 96,000 रुपए तक निकाल सकते हैं। केंद्र सरकार ऑनलाइन पेमेंट और ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने का तर्क देकर कम कैश भेज रही है। इससे बहुत भारी दिक्कतें आ रही हैं।बैंकों को आरबीआई की ओर से जरूरत के मुताबिक करेंसी नहीं मिल पा रही है।

10,000 रुपए नकद कैश भी नहीं मिल रही:- वित्त मंत्रालय ने बैंकों को निकासी की भीड़ से निपटने के लिए अतिरिक्त काउंटर खोलने के निर्देश दिए हैं। बैंकों से कहा गया है कि वेतन की निकासी के वक्त नकदी की कमी न हो इसकी व्यवस्था करने को पहली प्राथमिकता दी जाए। इसके अतिरिक्त बैंकों के समक्ष कारोबारियों की तरफ से भी वेतन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक नकदी देने का दबाव है। ज्यादातर छोटे कारोबारी अपने कर्मचारियों को नकद वेतन का भुगतान करते हैं। इसलिए इन्होंने बैंकों पर अभी से अतिरिक्त नकदी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ज्यादातर एटीएम को नई करेंसी के अनुकूल बनाने के बावजूद करीब 70 फीसद एटीएम नकदी की किल्लत से जूझ रहे हैं। दूसरी समस्या यह है कि जो एटीएम काम भी कर रहे हैं वहां केवल 2000 रुपए के नोट ही उपलब्ध हैं।ऐसे में छोटी करेंसी की दिक्कत जहां की तहां बनी हुई है। वैसे भी केंद्र सरकार का फोकस रबी की बुवाई के चलते नकदी उपलब्ध कराने के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों पर कहा जाता है परन्तु उन्हें भी अपनी जरुरत के मुताबिक नगद ना मिलने से उनकी बुवाई प्रभावित हो रही है। जिस किसान के परिवार में कोई बेतनभागी है वह कुछ हद तक की नगदी व्यवस्था करने में सक्षम हो सकता है। निरा किसान की हालत बड़ी दयनीय हैं। जहां केन्द्र व राज्य में अलग अलग पार्टी की सरकारें हैं।वहां अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए दूसरी सरकार पर यह जिम्मेदरी भी सौपी जा रही है और आरबीआई भी कम ही पैसा आंवंटित कर रहा है।

निकासी तथा कैश सप्लाई नियमों में एकरुपता नहीं :- पंजाब नेशनल बैंक की शाखाओं पर सैलरी के 4,000 रुपये, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं में 6,000 रुपए और एचडीएफसी बैंक की शाखाओं में सैलरी के 6 से 8 हजार रुपए, केनरा बैंक से 4,000 रुपए, बैंक आफ इण्डिया से 10,000 कैश दिए तथा इसी प्रकार के हर बैंक के अलग अलग नियम और कायदे चल रहे हैं । आरबीआई इस प्रकार का कोई ना तो आंकड़ा जुटा पा रहा है कि किस क्षेत्र में कितनी डिमाण्ड है कितनी आपूर्ति हो पा रही और कितनी और चाहिए। वे जरुरत के मुताबिक आपूर्ति ना करके मनमानी या लाट से जैसे-तैसे कर रहे हैं हर प्रदेश , हर जिले और हर बैंक में कैश निकासी की एक रुपता नहीं ला पा रही है। इनमें कोई एकरुपता देखने को नहीं मिलती हैं। जिसकी किस्मत अच्छी होती है उसे भुगतान मिल जाता है और जो देर से पहुंचता है, वह खाली हाथ वापस आता हैं। एसे लोग बैंक कर्मियों से उलझते हुए भी देखे गये हैं।

रिजर्व बैंक से कैश कम आने और जनता में कैश की बढ़ती मांग के मद्देनजर ही ज्यादातर बैंकों में सैलरी के दिए जाने वाले कैश में अपने लेवल पर कटौती की है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कैश पहुंच सके। ज्यादातर बैंकों ने टोकन सिस्टम से कैश देने की रणनीति अपनाई है। ये बैंक पहले लाइन में लगे सभी लोगों को टोकन दे रहे हैं और इसके बाद जितना कैश बैंक में पहुंचता है, उसको बांटे गए कुल टोकन से डिवाइड करके बांट कर दे रहे हैं। बैंकों की इस रणनीति की लोगों ने सराहना भी की है। लोगों का कहना है कि भले ही उन्हें कम कैश मिल रहा है, लेकिन यह अच्छी बात है कि जो कैश आ रहा है, वह ज्यादा हाथों में जा रहा है।

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