गणेश चतुर्थी पर इस समय करें मूर्ति की स्थापना, होंगे लाभ

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देहरादून। उत्तराखंड में गणेश चतुर्थी का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के मुताबिक गणेश उत्सव को 11 दिन तक मनाया जाता है। इस दिन भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याहृन में गणेश जी का जन्म हुआ था।

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी के दीं चांद का करें दर्शन

गणेश चतुर्थी में चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है। कहते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन चांद के दर्शन करने से कलंक लगता है। भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याहृन में गणेश जी का जन्म हुआ था। श्री गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता हैं।

इस समय होता है शुरू

चतुर्थी से शुरू होकर चतुर्दशी तक चलता है। चार सितंबर को शाम 6.52 मिनट पर चतुर्थी शुरू हुई है जो पांच सितंबर को रात 9.12 मिनट तक रहेगी। पांच सितंबर को सुबह 8.05 से रात 9.12 मिनट तक भद्रा रहेगी, लेकिन इन दिनों भद्रा का निवास पाताल में होगा।

मूर्ति स्थापना के लिए ये समय है शुभ

डॉ. आचार्य सुशांत राज के मुताबिक गणेश जी की मूर्ति की स्थापना पांच सितंबर को सुबह 11.33 मिनट से दोपहर 1.36 मिनट तक वृश्चिक लग्न में की जा सकती है। साथ ही, दोपहर 1.50 बजे से दोपहर 3.57 मिनट तक धनु लग्न में भी मूर्ति स्थापित की जा सकती है। लाभ की चौघड़िया 3.28 से 3.57 बजे तक यानी 29 मिनट तक रहेगी।

यह समय मूर्ति स्थापना के लिए सबसे अधिक शुभ माना जा रहा है। पांच सितंबर को चंद्रास्त रात 9.10 मिनट पर होगा। 15 सितंबर चतुर्दशी को गणपति विसर्जन दोपहर काल में करना शुभ है।

उत्तराखंड की बात करें तो यहां के लोगों में काफी उत्साह है। यहां ये पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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