गरीबी ने पहचानी सफलता की सीढ़ी, कैदियों ने भी पास की परीक्षा

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कानपुर। शहर बड़े-बड़े कॉलेज हैं। बिन अभाव वाले बच्चे भी हैं। उनके माता-पिता भी समर्थ हैं। लेकिन इस बार हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा में ऐसे बच्चों ने अपनी मेधा दिखाई जो पूरी तरह से अभाव में रहकर सफलता की तलाश में जुटे रहे। छात्राओं में शहर टॉप करने वाली हाईस्कूल की छात्रा निशा साहू हो या इंटर में ही छात्राओं में अस्मिता तो छात्रों में अव्वल रहे हिमांशु हों। ज्यादातर परीक्षा परिणाम में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राएं गरीबी का सामना करके इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

सफलता

शहर में अव्वल रही निशा साहू एक ट्रक चालक रहे व अब ट्रांसपोर्ट में मुनीम की बेटी है। जो बेटी को पढ़ाने के लिए सब्जी बेंचने का भी काम करते हैं। वहीँ हिमांशु एक गरीब किसान का बेटा है। मूलरूप से औरैया जनपद का निवासी शहर में हास्टल में रहकर पढ़ रहा था। उसकी प्रतिभा व गरीबी को देख स्कूल प्रबन्धन ने उसकी फीस माफ़ कर मेधा निखारने का रास्ता साफ़ कर दिया था।

शहर की टॉप लिस्ट में आने वाली नित्या, दीक्षा गुप्ता, कामिनी सिंह, कंचन वर्मा, ऐश्वर्या यादव, अंशिका, दीपिका व झांसी की मूल निवासी अमृता यादव आदि ऐसी छात्राएं हैं जिनके पिता ट्रक व ऑटो चालक, सब्जी का ठेला लगाने वाले हैं। या फिर जिनके सिर पर पिता का साया ही नहीं है। फीस और किताबों के खर्च का जैसे तैसे सामना कर इन्होंने आखिर सफलता की सीढियाँ पा ली हैं और उनमे चढ़ना भी शुरू कर दिया है।

सफलता पाने में कैदी भी नहीं रहे पीछे

कानपुर के जेल में विभिन्न अपराधो में बंद 3 कैदियो ने अपनी मेहनत और लग्न से यूपी बोर्ड के रिज़ल्ट में अपना नाम दर्ज करा दिया। जिला कारागार मे बंद इन कैदियो को जघन्य अपराध में सजा सुनाई गयी, लेकिन इनकी लगन से खुश हो कर जिला प्रशासन ने इनको पढ़ने का मौका दिया।

धारा 498, 304 और 302 जैसे अपराधियो के लिए समाज में किसी के प्रति दया नहीं होती, लेकिन आप के अच्छे काम आपको सारे गुनाह को कम करने का मौका ज़रूर दें सकते है। जिला कारागार में 498 और 304 की सजा काट रहे कानपुर गोविंदनगर के कृष्ण कुमार ने इंटर की परीक्षा में प्रथम श्रेणी से पास किया।

वहीं देवमणि पाण्डेय को जो 498ए और 304बी धारा जैसे अपराधो की सजा काट रहे हैं, इंटर में द्वित्तीय श्रेणी से सफलता पायी है और यही नहीं, गोविंद सिंह जो 302 यानी हत्या जैसे अपराध की सजा काट रहा हैं, वो भी समाज की परीक्षा में तो फेल रहे, लेकिन यूपी बोर्ड की परीक्षा में सफल रहे। गोविन्द कानपुर के घाटमपुर में एक हत्या की सजा काट रहा है।

कानपुर जेल के अधीक्षक विजय विक्रम सिंह का कहना है कि नई सोच के साथ जेल में कैदियो को पढ़ने का मौका दिया जा रहा है ताकि जो कैदी अपने जीवन की गलती को थोड़ा कम करने की सोच रहा है उसकी मदद की जा सके। इसी लिहाज से कैदियो को पढ़ने के लिए उत्साहित किया जाता है जिससे जेल से बाहर आने पर ये समाज में जगह बना सके। हालांकि कई कैदी ऐसे भी रहे जो बोर्ड परीक्षा में सफल नहीं हो पाये।

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