गरीबी बनी मां और बेटियों के जीवन का काल

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पैकोलिया/बभनान (बस्ती)। गरीबी ने हर समय अपना गंदा चेहरा दिखाया है। गरीबी से न जाने कितने घर बर्बाद हुए हैं। बस्ती में भी गरीबी से परेशान एक महिला ने अपनी तीन बेटियों समेत आत्मदाह कर लिया है।

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गरीबी और बेटियों का भविष्‍य बनी वजह

बताया जाता है कि महिला व दो मासूम बेटियों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि तीसरी बेटी ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। हादसे के समय महिला का पति मजदूरी करने गया था जबकि ससुर खेत में काम कर रहे थे।

एएसपी पहुंचे मौके पर
जैसे ही इस घटना की सूचना पुलिस को मिली तो एएसपी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

बस्तीे के पैकोलिया की घटना
बस्तीे के पैकोलिया थाने के बेलभरिया रामगुलाम गांव निवासी राजकुमार की शादी आठ वर्ष पूर्व छावनी अंतर्गत अकला गांव निवासी सीताराम की बेटी रीता से हुई थी। चार भाइयों में तीसरे नम्बर के राजकुमार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। एक कमरे के अर्धनिर्मित मकान में झोपड़ी में पत्नी रीता (30) और तीन बेटियों मालती (6), शान्ती (4) और दुर्गावती (2) रहती थीं। शुक्रवार को घर में रीता तीन बेटियों के साथ थी। पड़ोसियों के मुताबिक दिन में करीब दो बजे कमरे से धुंआ निकलते देख सभी भागकर मौके पर पहुंचे। दरवाजा तोड़कर अन्दर गए तो नजारा देख कांप उठे। रीता और मासूम शांति व दुर्गावती की जलने से मौत हो चुकी थी। जबकि मालती बुरी तरह जलकर बेहोश पड़ी थी। मालती को सीएचसी ले गए जहां से हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन कुछ ही देर बाद उसने भी दम तोड़ दिया।

मजदूरी से ही चलती थी रोजी-रोटी
गरीबी व तीन बेटियों का बोझ रीता के आत्मदाह का कारण बन गया। मजदूरी के सहारे पांच सदस्यों के कुनबे का पेट भरना ही भारी पड़ रहा था। भूमिहीन राजकुमार के पास संपत्ति के नाम पर एक अर्धनिर्मित मकान है। किसी तरह लोगों के खेतों की बटाई पर बुआई-जुताई कर परिवार की रोजी -रोटी चल रही थी।

फसल बर्बाद होने से टूटी कमर
बिना समय की बारिश और सूखे से लगातार तीन फसल बबार्द होने से पूरे परिवार की कमर ही टूट गई। बढ़ती मंहगाई में बेटियों के भविष्य को लेकर रीता हमेशा परेशान रहने लगी। मकान भी नहीं बन पाया और न ही सरकारी मदद ही मिली। मजदूरी कर पांच सदस्यों के कुनबे का पेट भर पाना ही दुश्वार हो गया था। अपना खेत भी नहीं था कि मेहनत कर आमदनी का जरिया बढ़ाते।

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