गलवान में तनाव कम करने को चीन से तीसरे दौर की बैठक, कल चुशूल में होगी वार्ता

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लद्दाख के गलवान घाटी में पिछले दिनों भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव को कम के लिए बातचीत का दौर जारी है. कोर कमांडर स्तर पर तीसरे दौर की बैठक कल मंगलवार को होगी.

पिछले एक महीने के अंदर दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर पर यह तीसरी बैठक होने जा रही है. इस बार यह बैठक भारतीय पक्ष में चुशूल में आयोजित की जा रही है. जबकि पिछली 2 बैठकें चीनी पक्ष में मोल्डो में हुई थी.

बातचीत का एजेंडा डिसएंजेगमेंट के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए गए प्रस्तावों को आगे ले जाने पर होगा. स्थिति को स्थिर करने के लिए वर्तमान गतिरोध के दौरान सभी विवादास्पद क्षेत्रों पर भी चर्चा की जाएगी.

इससे पहले कोर कमांडर स्तर पर अंतिम 2 बैठकें 6 जून और 22 जून को की गई थी. 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं.

इससे पहले लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव कम करने को लेकर 22 जून को मैराथन बैठक हुई थी. चीनी सेना के आग्रह पर यह बैठक बुलाई गई थी जो करीब 11 घंटे चली.

कोर कमांडर स्तर की बैठक चीन की तरफ मोल्डो इलाके में हुई. ये बैठक गलवान में चीन के साथ हुई झड़प के बाद बने तनाव को कम करने को लेकर हुई.

सूत्रों के मुताबिक चीन और भारत के बीच LAC पर कोर कमांडर स्तर की बैठक चली. बातचीत के दौरान भारत ने चीन से एलएसी से सैनिकों की वापसी के लिए समय सीमा मांगा था. इसके अलावा फिंगर 4 सहित 2 मई से पहले की स्थिति और तैनाती को बनाए रखने के लिए कहा गया है.

भारत की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने बैठक का नेतृत्व किया जबकि चीन की ओर से मेजर जनरल लियु लिन शामिल हुए. गलवान घाटी में खूनी झड़प के बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच यह बड़ी बातचीत हुई. इसका मकसद एलएसी पर पहले वाली स्थिति को बनाए रखना है.

इस बीच गलवान घाटी को लेकर दोनों देशों में तनाव जारी है. 15 जून के बाद से दोनों तरफ से झड़प की खबर नहीं है, लेकिन दोनों ओर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. दोनों ओर से तनाव को खत्म करने के लिए सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है.

लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेना के बीच 15 जून को हिंसक झड़प हुई थी. इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे, जबकि चीन के कई सैनिक हताहत हुए थे. हालांकि चीन ने मारे गए अपने सैनिकों की संख्या के बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की है

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