गांव का प्रधान हो या देश का कोई नियमों से ऊपर नहीं,पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरे देश में एक राशनकार्ड पर काम किया जाएगा. आज अगर सरकार सबको राशन दे रही है तो उसका क्रेडिट अन्नदाता किसान औऱ दूसरा ईमानदार टैक्सपेयर को जाता है. आपने देश का अन्न भंडार भरा है इसलिए आज गरीब का चूल्हा जल रहा है. आपने ईमानदारी से टैक्स भरा है, अपना दायित्व निभाया है इसलिए आज देश का गरीब संकट से मुकाबला कर पा रहा है. मैं हर किसान और करदाता को धन्यवाद देता हूं. आने वाले समय में हम अपने प्रयासों को और तेज करेंगे. हम सभी को सशक्त करने के लिए निरंतर काम करेंगे.

साथ ही यह भी कहाँ की पीएम ने कहा कि त्योहारों का समय खर्च भी बढ़ाता है. फैसला लिया गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार अब दिवाली और छठ पूजा तक, यानी नवंबर के आखिरी तक कर दिया जाएगा. वर्षा ऋतु के बाद कृषि क्षेत्र में ज्यादा काम होता है.  जुलाई से धीरे-धीरे त्योहारों का भी माहौल बनता है. सावन शुरू हो रहा है. रक्षाबंधन आएगा, कृष्ण जन्माष्मी आएगी. प्रत्येक परिवार को हर महीने पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना दिया जाएगा. इसमें 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे. पिछले महीने का खर्च भी जोड़ दें तो करीब 1.5 लाख करोड़ हो जाता है.

पीएम ने कहा कि कोरोना से लड़ते हुए भारत में 80 करोड़ लोगों को तीन महीने का राशन मुफ्त दिया गया है. इसके अतिरिक्त प्रत्येक परिवार को हर महीने एक किलो दाल भी दी गई. एक तरह देखें तो अमेरिका की कुल जनसंख्या से ढाई गुना अधिक लोगों को, ब्रिटेन की जनसंख्या से 12 गुना अधिक लोगों को, और यूरोपीय यूनियन की आबादी से दोगुने से ज्यादा लोगों को सरकार ने मुफ्त अनाज दिया.

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