बड़ा खुलासा : तबाह हो सकता है उत्तराखंड, हर गांव पर है आपदा का खतरा!

0

देहरादून। उत्तराखंड के हर गांव पर आपदा का खतरा मंडरा रहा है। यहां भारी बारिश और उसके बाद भूस्खलन के चलते कई गांव प्रभावित हुए। वहीं राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र की हाल की एक भू अध्ययन रिपोर्ट इस ओर इशारा भी कर रही है। इस रिपोर्ट में पहाड़ियों को कमजोर बताया जा रहा है।

गांव पर आपदा

गांव पर आपदा का खतरा बढ़ा

रिपोर्ट में कुछ समय पहले ही सड़क निर्माण से पहाड़ी के कमजोर होने और पोर प्रेशर सहन न कर पाने से ढहने की आशंका जताई गई है। जिससे वहां मौजूद हर गांव पर आपदा का खतरा बढ़ता नज़र आ रहा है। केंद्र ने इस रिपोर्ट में बस्तड़ी और आसपास के प्रभावित दर्जन भर गांवों में पिछले पांच सालों में भू उपयोग में किए गए बदलाव की पड़ताल करने का सुझाव दिया है।

पहले सेफ जोन में था उत्तराखंड

रिपोर्ट के मुताबिक बस्तड़ी पूरी तरह से सेफ जोन में था। पहले भी यहां पर भारी बरसात हुई पर लोगों को कभी भूस्खलन का सामना नहीं करना पड़ा। बस्तड़ी गांव के ऊपर ही करीब 50 डिग्री का ढाल है और एक जुलाई को हुई भारी बारिश से यह पहाड़ी दरक गई। ढाल के कारण बस्तड़ी तक मलबे को पहुंचने में बेहद कम समय लगा।

बस्तड़ी के बचे हुए गांव पर आपदा का खतरा बढ़ा

रिपोर्ट में बस्तड़ी के बचे हुए गांव को भी असुरक्षित माना है। इस घटाटोप में बस्तड़ी के लिए राहत की बात यह है कि केंद्र ने बस्तड़ी के विस्थापन के लिए प्रस्तावित जमीन को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है। केंद्र का यह अध्ययन प्रदेश के अन्य सुरक्षित समझे जाने वाले गांवों के लिए भी खतरे का संकेत है।

बादल फटने की घटनाएं बढीं

मौसम बदलाव के कारण बारिश की तीव्रता में इजाफा हो रहा है और बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। रिपोर्ट का साफ इशारा है कि विकास के नाम पर संबंधित क्षेत्र की भू संरचना को दरकिनार कर किए जा रहे निर्माण और मौसम बदलाव की जुगलबंदी ने बस्तड़ी की आपदा को जन्म दिया। यही कहानी उत्तराखंड में अन्य स्थानों पर भी दोहराई जा रही है।

इसलिए हो रहा है भूस्खलन

मध्य हिमालय में ज्यादातर भूस्खलन क्षेत्र है। सड़क निर्माण में एक किमी में करीब 40 पेड़ काटे जा रहे है। एक किमी में 40 से लेकर 80 हजार घन मीटर मलबा निकलता है। यह मलबा नदियों में नीचे फेंक दिया जा रहा है। इससे पानी के चैनल प्रभावित हो रहे हैं। बागेश्वर की रीमा घाटी और पिथौरागढ़ केथल में खड़िया के लिए खदान हो रहा है। यह सब मिलकर नए भूस्खलन क्षेत्रों को जन्म दे रहे हैं।

loading...
शेयर करें