बकरीद से पहले ही निपट गए गायत्री प्रजापति और राजकिशोर सिंह

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लखनऊ। सीएम अखिलेश यादव ने अपने दो मंत्रियों को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। जिसमें कोयला और खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह का नाम शामिल है। गायत्री प्रजापति कई बार अवैध खनन के आरोप लगे हैं। मुख्यमंत्री ने दोनों की बर्खास्तगी के लिए राज्यपाल राम नाईक को लेटर भेज दिया है।

गायत्री प्रसाद प्रजापति

 

सपा सरकार को तगड़ा झटका

पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खनन घोटाले मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। जो अखिलेश सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा था। कोयला और खनन के इस घोटाले से सभी विपक्षी पार्टियों को एक बड़ा मुद्दा मिल गया था। विपक्ष को कोई मुद्दा न देते हुए मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया है।

यूपी में अवैध खनन की सीबीआई जांच रुकवाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी बेंच में पहुंची अखिलेश सरकार को तगड़ा झटका लगा था। हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार से सवाल पूछा था कि अगर खनन में कोई गड़बड़ी नहीं है तो सरकार जांच से क्यों बचना चाहती है। गायत्री प्रजापति अपनी कार्यशैली को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं।

समाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने लगाए थे आरोप

गायत्री पर अवैध खनन के आरोप लगते रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने कई बार प्रजापति की शिकायत लोकायुक्त में की थी।लखनऊ की समाजसेवी नूतन ठाकुर बताती हैं कभी गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले प्रजापति आज बेहिसाब दौलत के मालिक हैं। कहा जाता है कि उनके पास कई सौ करोड़ रुपए की संपत्ति है।
इस बात का अंदाजा उनके चुनावी हलफनामे से लगा है। साल 2002 में विधायक का चुनाव लड़ने के दौरान प्रजापति ने अपने चुनावी हलफनामे में कुल 91,436 रुपए बताई थी। 2012 के विधानसभा चुनाव के लिए भरे पर्चे के साथ लगे हलफनामे में गायत्री ने अपनी कुल संपत्ति 3 लाख 71 हजार 720 रुपए बताई थी।
कहा जा रहा है कि उनकी संपत्ति अब बढक़र दो लाख बाहर हजार करोड़ रुपए हो गई है। आज उनके पास कई बंगले, गाड़ी, फॉर्म हाउस सहित सैकड़ों करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इनकी लखनऊ के मुख्यमंत्री आवास के बगल में सरोजनी नायडू मार्ग पर आलीशान कोठी है। इसे कोई राजनीति का मुद्दा बनाने को तैयार नहीं है।

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