सुप्रीम कोर्ट ने गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट कंपनियों को इस मामले में लगाई फटकार

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नई दिल्‍ली। देश की सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने टेक्‍नोलॉजी कंपनियों गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों कंपनियों को लिंग मामले की सुनवाई करते हुए सख्‍त निर्देश दिए।

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू को फटकार

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू को फटकार लगाते हुए अपनाया सख्‍त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने लिंग मामले में यह पाया है कि इन तीनों कंपनियों को भारतीय कानून की कोई कद्र नहीं है। कोर्ट ने लींग परीक्षण से जुड़े कंटेंट को बैन करने के लिए इन कंपनियों से एक इंटर्नल एक्सपर्ट पैनल बनाने का भी निर्देश दिया है, जो गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग जांच से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों की पहचान करके, उससे जुड़ी चीज़ें दिखाने से रोके।

लिंग  मामले में दूसरे देशों से की तुलना

कोर्ट ने दूसरे देशों में ऐसे ही कंटेंट बैन होने का उदाहरण देते हुए गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट को भारतीय कानून के प्रति उत्तरदायी होने की बात कही है। कोर्ट का कहना है कि जब दूसरे देशों में ये कंटेंट बैन है तो भारत से क्यों नहीं हो सकता।

भारतीय कानून का नहीं कर सकते उल्‍लंघन

एक पिटिशन की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीनों कंपनियों से कहा, ‘आप किसी देश के कानून का उल्लंघन नहीं कर सकते. भारतीय कानून के प्रति आपको उत्तरदायी होनो होगा’. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सभी कंपनियों के वकीलों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वो हर हाल में भारतीय कानून का सम्मान और पालन करते रहेंगे।

अगली सुनवाई 11 अप्रैल को

अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होगी. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट तीनों इंटरनेट कंपनियों को कई बार फटकार लगा चूका है और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दे चुका है।

पिछले साल भी दिया था निर्देश

पिछले साल दो जजों की एक बेंच ने भी गूगल इंडिया, याहू इंडिया और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को लिंग परीक्षण से जुड़े कंटेंट्स को शिकायत को 36 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया था। मार्च 2015 में कोर्ट ने इन तीनों कंपनियों को निर्देश दिया था कि प्री कॉन्सेप्शन और प्री नैटल डाइगनोस्टिक टेक्नीक एक्ट 1994 का उल्लंघन करने वाले किसी भी विज्ञापन को न चलाए।

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