नोट बंदी के बीच अपनी संभावना तलाश रही है गूगल

गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई ने नोटबंदी के मोदी सरकार के फैसले से काफी प्रभावित हैं।  इन्होंने आाशा जताई है कि इसके चलते भारत डिजिटल पेमेंट्स के तौर तरीकों को लेकर काफी आगे निकल सकता है। इस समय भारत का दौरा कर रहे पिचाई ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में डिजिटाइजेशन करना और इसे ठीक से अंजाम देना बहुत फायदेमंद होगा।
डिजिटल पेमेंट से जुड़ने की इच्छा
गूगल के सीईओ ने कहा कि उनकी कंपनी ज्यादा ‘डिजिटाइज्ड’ इंडियन इकॉनमी के लिए प्रॉडक्ट्स तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी नजर यूपीआई पर है। हम यह भी देख रहे हैं कि ऐंड्रॉयड सहित हमारे प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज कैसे डिजिटाइजेशन को बेहतर ढंग से सपोर्ट कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डॉनल्ड ट्रंप की जीत के चलते संरक्षणवाद से जुड़ी चिंताओं को 44 वर्षीय पिचाई ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कहा कि मुझे हमेशा यही लगा है कि अमेरिका एक खुला और सबको अपने साथ जोड़ने वाला समाज है। मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई बदलाव आएगा।
कई छोटी कंपनियां बनेंगी बड़ी
उन्होंने कहा कि अमेरिका में कंपनियां कारोबारी होड़ का बहुत ख्याल रखती हैं। यही वजह है कि वे दुनिया में बेहतरीन हैं। पिचाई हालांकि इंडियन स्टार्टअप्स के प्रति नरम नहीं दिखे, जो विदेशी होड़ को देखते हुए देसी कंपनियों को सरकारी नीतियों में वरीयता देने की मांग कर रही हैं। पिचाई ने कहा कि मेरी राय है कि अगले 5-10 वर्षों में भारत में ऐसी ज्यादा कंपनियां होंगी, जो ग्लोबल लेवल पर होड़ करेंगी।
दुनिया से लेनी होगी होड़
उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए आपको ग्लोबल सिस्टम में शामिल होना पड़ेगा, जहां आप ग्लोबल मार्केटप्लेस में खुद को तौल सकेंगे। इससे न केवल भारत में, बल्कि इसके बाहर भी कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। पिचाई ने कहा कि गूगल के प्रॉडक्ट्स के लिए भारत अहम बना रहेगा। मसलन, यूट्यूब और मैप्स के ऑफलाइन वर्जन को ग्लोबल लेवल पर लॉन्च करने से पहले इंडिया में टेस्ट किया गया था। गूगल अब यूट्यूब गो पर काम कर रही है, जिसे पहले इंडिया में लॉन्च किया जाएगा। पिचाई ने कहा कि भारत जैसे देशों के लिए मेरा एक लक्ष्य हाई क्वॉलिटी प्रॉडक्ट तैयार का है, जो यहां की सभी भाषाओं में हो।

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