नेटवर्किंग में जुटी गोरखपुर पुलिस, बनाई गई एस-7 और एस-10 कमेटियां

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गोरखपुर। गांव, गली और मोहल्लों तक जुड़ने के लिए गोरखपुर पुलिस ने पहल तेज कर दी है। कम्युनिटी पुलिसिंग के माड्यूल पर गोरखपुर पुलिस ने एक नया और मजबूत नेटवर्क खड़ा करना शुरू कर दिया है। मकसद है अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखना। पुलिस का यह प्रयोग सफल रहा तो हर घटना और संभावित उपद्रवों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। जो नया नेटवर्क तैयार हो रहा है वह सिर्फ टेलीफोनिक नहीं है। यह वाट्स एप्प और सोशल मीडिया जैसे त्वरित माध्यमों से जुड़ा हुआ है। यानी हर सूचना फौरन पुलिस के पास आएगी।

गोरखपुर पुलिस

एसएसपी अनंत देव तिवारी ने जनवरी महीने में कार्यकाल संभालने के तुरंत बाद कहा था कि वह कम्युनिटी पुलिसिंग पर जोर देंगे। महज एक माह के भीतर उन्होंने अपने वायदे पर काम कराना शुरू कर दिया है। थानेदारों की मदद से गांवों में कम्युनिटी गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। जनपद के संवेदनशील कस्बों की बैठकों में एसएसपी ने स्वयं हिस्सा लिया। उन्होंने लोगों को कम्युनिटी पुलिसिंग का मतलब समझाया और मातहतों से कहा है कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस अभियान के बारे में जागरूक करें।

गोरखपुर पुलिस ने रखे एस-7 और एस-10 नाम

कम्युनिटी पुलिसिंग का जो माड्यूल एसएसपी अनंत देव तिवारी गोरखपुर में लागू करने में जुटे हैं, उनके नाम हैं एस-7 और एस-10, एस-7 माड्यूल गांवों के लिए है। जहां कम से कम सात लोगों की कमेटी बनाई जा रही है। इस कमेटी में गांव के प्रधान के अलावा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार शामिल होंगे। अगर उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा होगी तो एस-7 के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इस कमेटी का काम गांव में होने वाले छोटे-छोटे विवादों को बढ़ने से रोकना है। एस-10 दस ऐसे अच्छी छवि वाले लोगों की कमेटी होगी जो संवेदनशील क्षेत्रों में बनाई जाएगी। इस कमेटी में सभी धर्मों के लोगों की बराबर प्रतिभागिता होगी। इस कमेटी का काम ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जो साम्प्रदायिक हिंसा रोकने में मददगार हो।

सूचनाओं से लैस होगी पुलिस

वैसे तो एस-7 और एस-10 जैसी कमेटियां सिर्फ विवाद और उपद्रव रोकने के लिए गठित हो रही हैं लेकिन इनका एक और लाभ भी पुलिस को मिलेगा। जानकारों का दावा है कि अगर पुलिस ने ढंग से इन कमेटियों से समन्वय बनाकर रखा तो अपराध नियंत्रण में काफी मदद मिलेगी। इन कमेटियों से कई महत्वपूर्ण सूचनाएं पुलिस आसानी से हासिल कर सकती है बशर्ते समन्वय अच्छा होना चाहिए।

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