बंगाल में फिर उठी अलग राज्य की मांग

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नई दिल्ली। विदर्भ, बोडोलैंड और यूपी के विभाजन की मांग के बीच पश्चिम बंगाल में एक नए राज्य की मांग उठी है। बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ग्रेटर कूचबिहार राज्य के गठन की मांग के लिए शुरू हुए आंदोलन ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे इस क्षेत्र की रेल सेवाएं अस्त-व्यस्त हैं और कई ट्रेनें रद्द भी करनी पड़ी हैं।

ग्रेटर कूचबिहार

ग्रेटर कूचबिहार राज्य के लिए धरना

ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन (जीसीपीए) नामक संगठन अपनी मांगों को लेकर न्यू कूचबिहार स्टेशन पर रेल की पटरियों पर धरना दे रहा है। नतीजतन रेल सेवाएं अस्त-व्यस्त हैं। रेल रोको आंदोलन के कारण एक ट्रेन के कई घंटे तक कूचबिहार स्टेशन पर खड़े रहने की वजह से एक यात्री की मौत भी हो चुकी है।

जीसीपीए कूचबिहार को केंद्रशासित प्रदेश या सी श्रेणी के राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहा है संगठन के हजारों समर्थक रेलवे पटरियों पर धरना दे रहे हैं। इस वजह से देश के बाकी हिस्सों से पूर्वोत्तर का रेल संपर्क लगभग ठप हो गया है। कुछ ट्रेनों का रास्ता बदला गया है तो कुछ को गंतव्य से पहले ही रोक दिया गया। इस बीच, कोलकाता के दौरे पर आए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आंदोलनकारियों से ट्रेनों की आवाजाही ठप नहीं करने और रेलवे की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की थी लेकिन उनकी अपील का कोई असर नहीं पड़ा है।

ग्रेटर कूचबिहार

जीसीपीए अध्यक्ष बंशी बदन बर्मन की दलील है कि कूचबिहार के महाराजा और भारत सरकार के बीच हुए एक समझौते के तहत कूचबिहार राज्य को भारत में शामिल किया गया था। लेकिन बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री विधानचंद्र राय ने बाद में इसे एक जिले के तौर पर राज्य में शामिल किया। उन्होंने कहा कि कूचबिहार को सी दर्जे के राज्य या केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। बर्मन मानते हैं आंदोलन से आम यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है लेकिन उनका कहना है कि कूचबिहार के लोग तो बीते 66 वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं।

बर्मन ने कहा कि संगठन तीन दिनों से न्यू कूचबिहार स्टेशन पर धरना दे रहा है लेकिन अब तक कोई भी अधिकारी उनसे बातचीत के लिए नहीं आया है। यह स्थानीय लोगों के अपमान का ताजा सबूत है। बर्मन ने कहा कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि बातचीत के लिए यहां नहीं आते तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

 

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