ग्लेशियर के सिकुड़ने से नहीं सूखेंगी देश की नदियां

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ग्लेशियरइन दिनों पानी की कमी से पूरा देश परेशान है। ऐसे में बताया जा रहा थी कि ग्लेशियर के सिकुड़ने या पिघलने से नदियों का पानी खत्म हो जाएगा। लेकिन यह बात जानकार आपको खुशी होगी कि ग्लेशियरों के सिकुड़ने या पिघलने से नदियों में पानी खत्म नहीं होगा।

ग्लेशियर के सिकुड़ने पर हुआ रिसर्च

उच्च हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियर से गंगा व ब्रह्मपुत्र बेसिन में आने वाले पानी का रिसर्च किया गया। जिसके बाद वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि ग्लेशियरों के सिकुड़ने से नदियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

रिसर्च के मुताबिक हिमालय की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कम से कम इस शताब्दी में तो नदियों में पानी की मात्रा पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पर्यावरण से जुड़े कुछ संगठन अक्सर यह आशंका जताते रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग से सिकुड़ रहे ग्लेशियर के कारण नदियों में पानी खत्म हो जाएगा।

स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक डब्ल्यूडब्ल्यू इमरजील, एफ पिकोटी और एमएफपी ब्रिकेंस ने हिमालय क्षेत्र में इस बाबत रिसर्च किया। उच्च हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियर से ब्रह्मपुत्र और गंगा में आने वाले पानी की मात्रा जांची गई। पाया गया गया कि नदियों में ग्लेशियर का सिर्फ 10 फीसदी पानी ही होता है। नदियों में बाकी पानी बारिश और भूगर्भ जलस्रोतों से आता है।

बारिश के पानी में नहीं आई कोई कमी

वैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन से बारिश के समय में तो बदलाव आया है लेकिन वर्षा जल की मात्रा में कोई कमी नहीं आई है। उनका कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग से पहले रिमझिम बारिश कई दिनों तक चलती थी, लेकिन अब एक ही समय में इकट्ठी बारिश हो जा रही है।

हिमालय क्षेत्र में अब बर्फबारी के बाद बर्फ जल्द पिघल जाती है, जिससे ग्लेशियरों को नुकसान हो रहा है। अगर ग्लेशियर से पिघल कर आने वाला पानी बहुत कम हो जाएगा तो भी बारिश से नदियों को पर्याप्त जल मिलता रहेगा।

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