चंपारण सत्याग्रह की सौवीं सालगिरह पर मोदी बोले, चंपारण ने दिया पंचामृत

0

नई दिल्‍ली। पीएम मोदी ने चंपारण सत्‍याग्रह की सौवीं सालगिरह पर महात्‍मा गांधी को याद किया। उन्‍होंने गांधीजी को याद करते हुए कहा कि उनके एक सपने को स्वच्छाग्रह के नये तेवर औऱ कलेवर में शुरू किया। पीएम ने कहा कि चंपारण से हमें पंचामृत मिला। सत्याग्रह की शक्ति का सार्वजनिक परीक्षण हुआ, जनशक्ति की ताकत का पता चला, स्वच्छता और शिक्षा जन जन तक पहुंची, महिलाओं की स्थिति सुधरी और अपने हाथों से कते बने कपड़ों का चलन बढ़ा…’

चंपारण सत्‍याग्रह की सौवीं सालगिरह

चंपारण सत्‍याग्रह की सौवीं सालगिरह पर गांधी को किया याद

पीएम ने कहा कि गांधी के पहले सत्याग्रह से निकले इस अमृत को जनता के जेहन तक पुहुंचने में 70 साल लग गए। आजादी तो मिल गई, लेकिन स्वच्छता के मंत्र का अर्थ जानने में 70 साल लगे। अब स्वच्छता लोगों की सोच में आ गई है। बच्चे अभिभावकों को सिखा रहे हैं। स्वच्छता के लिए किया गया काम ही तो स्वच्छाग्रह है। स्वच्छता की यही सोच ही न्यू इंडिया की नींव मज़बूत करेगी, स्वच्छ, स्वस्थ और कुशल भारत की. सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह गांधी की देन है, गांधी का मंत्र है।

इतिहास से लेनी चाहिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने रंगारंग कार्यक्रम में मालिनी अवस्थी की स्वरलहरी और कथक, कुचीपुड़ी, छऊ और भरतनाट्यम की मिली-जुली नृत्यनाटिका की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास से हम काफी कुछ सीख सकते हैं। इतिहास के कई मोड़ सदियों को पारस स्पर्श जैसी प्रेरणा देते हैं। हमारा कायाकल्प करते हैं। इतिहास की बात करें तो हमारे देश का इतिहास किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है। ज़रूरत है हम आंखें खोलें और इतिहास की नवीन खोज से प्रेरणा लें।

पारस स्‍पर्श का अवसर है चंपारण सत्‍याग्रह की सौवीं सालगिरह

उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह का सौवां साल भी ऐसा ही पारस स्पर्श का अवसर है। स्वच्छाग्रह यही अवसर है। चंपारण ने ही गांधी की सत्याग्रह की ताकत को नई धार दी. जनता तक उन्होंने सत्याग्रह का मंत्र पहुंचाया। गांधीजी मूल रूप से स्वच्छाग्रही थे. उन्होंने आज़ादी से ज़्यादा ज़रूरी स्वच्छता को बताया। स्वराज स्वच्छराज से कमतर नहीं।

loading...
शेयर करें