दो सौ रुपए के लिए रोज करता है मौत का सामना

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चिडिय़ाघरनई दिल्ली। इंसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए क्या कुछ नहीं करता है। औरंगाबाद में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया है। जहां एक 25 साल का प्रवीण रोज अपनी जान पर खेल कर अपना और अपने घर वालों का पेट पाल रहा है। प्रवीण सिर्फ 6 हजार रुपए वेतन के लिए हर रोज 90 से भी ज्यादा जहरीले सांपों का सामना करता है। दरअसल प्रवीण यहां सिद्धार्थ गार्डन और चिडिय़ाघर में सांपों को रखने के लिए बने 16 कमरों की सफाई करता है।

चिडिय़ाघर में जहरीले सांपो का करता है सामना

प्रवीण का सामना रोज जिन सांपों से होता है उनमें से 50 बेहद जहरीले सांप हैं। प्रवीण इन कमरों की सफाई के अलावा सांपों को खाना भी खिलाता है। वह हर दिन इन सांपों को 2 बार चिकन के टुकड़े और मेंढ़क खिलाता है और ठंडा रखने के लिए उन पर पानी का छिड़काव भी करता है।

यह चिडिय़ाघर नगरपालिका के अधिकारक्षेत्र में है, लेकिन नगर निगम ने प्रवीण का ना तो जीवन बीमा कराया है और ना ही उन्हें किसी तरह के सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं। प्रवीण को निजी अनुबंध के तहत यहां नौकरी पर रखा गया है।

एक छड़ी और गमबूट के सहारे ही प्रवीण कोबरा और वाइपर जैसे जहरीले सांपों को संभालता है। उसने बताया कि मैं दस्ताने पहनने से बचता हूं। दस्ताने के कारण मैं ठीक से काम नहीं कर पाता। बिना दस्ताने आराम से काम कर पाता हूं।

प्रवीण ने बताया कि साल 2006 में उनके दाहिने हाथ के अंगूठे पर कोबरा ने काट लिया था। उस समय वह पास के एक गांव में सांप पकडऩे की कोशिश कर रहा था। सांप के डंसने के बाद प्रवीण को सरकारी मेडिकल अस्पताल में ले जाया गया जहां दो दिन तक उसका उपचार हुआ। उसके परिवार में पत्नी के अलावा 11 महीने का एक बेटा भी है।

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