चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी देने से इंकार कर सकते हैं उपराष्ट्रपति, ये है वजह

नई दिल्ली। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए विपक्षी दलों ने उपराष्ट्रपति को नोटिस दिया है। दीपक मिश्रा के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की जांच स्वयं राज्यसभा सभापति करेंगे। इसके लिए वह देश के प्रमुख कानूनविदों व सलाहकारों की राय लेंगे। पूरी जांच-पड़ताल के बाद अगर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप सच नहीं पाए गए। इसके अलावा अगर उपराष्ट्रपति स्वयं इन आरोपों को पुख्ता मानने से इंकार कर दें तो, वह मुख्य न्यायधीश के खिलाफ इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इंकार कर सकते हैं।

जानिए अगर प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया तब क्या होगा
चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर वैंकेया नायडू पूरा समय ले सकते हैं। पूरे तरीके से संतुष्ट होने के बाद अगर वह विपक्षी पार्टियों द्वारा दिए गए इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लते हैं तो किसी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस व कानूनविदों की तीन सदस्यीय समित के पास यह मामला भेजा जाएगा।

भारतीय संविधान के एक अनुसार एक न्यायधीश को उसके पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों प्रस्ताव पारित कराने की आवश्यकता होती है। इसके बाद राष्ट्रपति के आदेश देने के बाद ही उसे पद से हटाया जा सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक अगर राज्यसभा के सभापति प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते हैं तो याचिकाकर्ता कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। नोटिस देना सदन के किसी भी नियम के तहत नहीं आता बल्कि यह शक्ति कानून की ओर से प्रदान की गई है।

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