छात्रसंघ चुनाव कराना सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य

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लखनऊ। छात्र राजनीति के जरिये देश-प्रदेश की राजनीति में भविष्य तलाशने वालों के लिए समाजवादी पार्टी  सरकार सौगात लेकर आई है। अखिलेश सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने का आदेश दिया है। चुनाव लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार होंगे। शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने इसके औपचारिक आदेश जारी कर दिए। सरकार की मंजूरी मिलते ही प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेन्द्र कुमार ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ ही डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों को छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इस बारे में निदेशक उच्च शिक्षा को कहा गया है कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार साफ-सुथरे तरीके से छात्रसंघ चुनाव करवाएं। कमेटी में छात्रसंघ के गठन, छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया के तौर-तरीके दिए गए हैं। इसको लागू किया जाना बाध्यकारी है। जारी आदेश में सभी डीएम व एसएसपी को चुनाव में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।

छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया 10 दिन में पूरी करनी होगी

प्रदेश सरकार ने सत्र शुरू होने के आठ सप्ताह के भीतर इसे कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार ‘मोड ऑफ इलेक्शन’ तय करने का अधिकार विश्वविद्यालय का है। छात्रसंघ चुनाव की पूरी चुनाव प्रक्रिया 10 दिनों में निपटाना होगा। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव कराने व उसकी आचार संहिता का कड़ाई से पालन कराना होगा। छात्रसंघ चुनाव के दौरान गलियों, सड़कों, पार्कों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर चुनावी सभाएं आयोजित करने की अनुमति नहीं होगी। मत प्राप्त करने के लिए जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं दी जाएगी। धार्मिक स्थलों का प्रयोग चुनाव प्रचार में नहीं किया जाएगा। वोट लेने के लिए वोटरों को रिश्वत देना व उन्हें डराना-धमकाना प्रतिबंधित है। कैंपस के अंदर निश्चित स्थानों पर ही हाथ से बने पोस्टर का उपयोग प्रत्याशी कर सकेंगे।

चुनाव नहीं कराये तो कॉलेज-विवि प्रशासन होंगे जिम्मेदार

हाईकोर्ट ने संतकबीरनगर स्थित एचआर पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, खलीलाबाद में छात्रसंघ चुनाव के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ निर्देश दिया था कि चुनाव न करा पाने पर विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और जिला व पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाए। प्रदेश सरकार ने भी छात्रसंघ चुनाव न करा पाने पर विवि व महाविद्यालय प्रशासन को दोषी ठहराने का निर्णय लिया है।

ये नियम-कानून होंगे लागू

उम्र सीमा यूजी में 22 वर्ष, पीजी के लिए 25 वर्ष व शोध छात्र के लिए 28 वर्ष
चुनाव लड़ने के लिए नियमित छात्र होना व न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी
आपराधिक रिकॉर्ड, सजा या अनुशासनात्मक कार्रवाई होने पर नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
एक प्रत्याशी अधिकतम पांच हजार रुपये कर सकता है खर्च
प्रिंटेड पोस्टर, पम्फलेट व प्रचार सामग्री का प्रयोग प्रतिबंधित
छोटे कैंपस में सीधे प्रतिनिधि चुनने की व्यवस्था
एक से अधिक कैंपस वाले कॉलेजों में अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव

लिंगदोह समिति की प्रमुख सिफारिशें

लाउडस्पीकर व वाहनों का प्रयोग प्रतिबंधित
छात्रसंघ चुनाव में लाउडस्पीकर व वाहनों के प्रयोग पर प्रतिबंध रहेगा। जानवरों का भी उपयोग चुनाव प्रचार में नहीं किया जा सकेगा। विवि की अनुमति लेकर ही जुलूस निकाला जा सकता है।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन किया तो जाएगा पद
लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन करने पर चुने गए छात्रसंघ प्रतिनिधियों को पद से हटाया जा सकता है। विवि एवं महाविद्यालय के प्राधिकारी ऐसी स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं।
कुलपति तय करेंगे चुनाव कार्यक्रम

मायावती ने लगाईं थी चुनाव पर रोक

छात्रसंघ चुनाव पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने प्रतिबंध लगाया था। 2012 में जब सूबे में अखिलेश यादव की सरकार बनी तो उन्होंने चुनाव से प्रतिबंध हटा लिया था। इसके बाद कुछ महाविद्यालयों ने तो अपने यहां चुनाव करा लिए, लेकिन ज्यादातर ने इससे दूरी ही बनाए रखी। यहां तक कि लखनऊ विश्वविद्यालय ने भी अपने यहां छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए। सरकार के आदेश के बाद अब चुनाव जल्द होने की उम्मीद है।

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