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जम्मू-कश्मीर में मुख्‍यमंत्री बनने में देरी पर राज्यपाल शासन लागू

नई दिल्‍ली। जम्‍मू कश्‍मीर में राज्‍यपाल शासन लागू कर दिया गया है। मुख्‍यमंत्री मुफ्ती मोहम्‍मद सईद के निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती ने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेने से इनकार कर दिया था। इस संवै‍धानिक संकट  से निपटने के लिए शनिवार की देर रात से राज्‍यपाल शासन लागू कर दिया गया।

जम्‍मू

जम्‍मू के बदलते राजनीतिक हालात

इससे पहले शुक्रवार को राज्यपाल एनएन वोहरा ने सरकार निर्माण को लेकर पीडीपी और बीजेपी दोनों दलों को पत्र लिखा था। चूंकि ज म्‍मू-कश्‍मीर में भाजपा-पीडीपी की साझा सरकार है इसलिए राज्यपाल ने पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और बीजेपी अध्यक्ष से सरकार के गठन के बारे में स्थिति साफ करने को कहा था।

पढ़ें : ये है मुफ्ती मोहम्‍मद सईद की अधूरी कहानी

नए मुख्‍यमंत्री के शपथ ग्रहण में भ्रम की स्थिति पैदा होने पर वोहरा ने इसकी रिपोर्ट केन्‍द्र सरकार को भी भेजी थी, जिसके बाद राज्‍यपाल शासन लागू करने का फैसला लिया गया।

दरअसल, शुक्रवार को तेजी से बदलते घटनाक्रम के बाद भी जम्‍मू में मुख्‍यमंत्री की कुर्सी कौन संभालेगा, यह फैसला नहीं हो पाया था। हालांकि बीजेपी महबूबा के नाम पर राजी है, लेकिन उसने राज्यपाल के सामने महबूबा के नाम पर औपचारिक रूप से अपनी सहमति दर्ज नहीं कराई है।

पीडीपी सांसद मुजफ्फर बेग ने साफ किया है कि महबूबा ही मुफ्ती मोहम्मद सईद की रस्मे चाहरूम के बाद शपथ लेंगी। इस बीच बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव भी शुक्रवार को श्रीनगर पहुंचे और महबूबा से मुलाकात की। राम माधव ने बीजेपी विधायक दल के साथ भी बैठक की। बीजेपी नेता दिल्ली लौटे तो यहां भी शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक की। बीजेपी भी महबूबा मुफ्ती को जम्‍मू-कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री के रूप में देख रही है।

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