दफन हुईं जयललिता, अब सबकी नजरें तमिलनाडु की राजनीति पर, उठ रहे कई सवाल

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नई दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे.जयललिता का मंगलवार को मरीना बीच पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके राजनीतिक गुरु तथा ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के संस्थापक एम.जी.रामचंद्रन (एमजीआर) के स्मारक के निकट उन्हें दफन कर दिया गया। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तमिलनाडु सरकार और AIADMK का क्या होगा। 

जयललिता के निधन

जयललिता के निधन के बाद अब सबकी नजरें तमिलनाडु की राजनीति पर

किसान के बेटे पन्नीरसेल्वम ने तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में पूर्णकालिक कार्यभार सोमवार रात जयललिता के निधन के बाद ग्रहण किया। तमिलनाडु के बहुत से लोगों का कहना है कि अम्मा के प्रति वफादारी ने उन्हें इस पद का दावेदार बनाया। अन्नाद्रमुक विधायकों ने जयललिता के अस्पताल में निधन के बाद यहां सर्वसम्मति से पनीरसेल्वम का समर्थन किया। पन्नीरसेल्वम ने मंगलवार सुबह शपथ ग्रहण किया।

उठ रहे हैं कई सवाल

जानकारों का मानना है कि जयललिता के बाद ओ़ पनीरसेल्वम मुख्यमंत्री बन तो गए हैं लेकिन कंट्रोल शशिकला का ही रहेगा। क्या शशिकला खुद मुख्यमत्री नहीं बनना चाहेंगी, यह सवाल भी हवा में है। जैसे ही अम्मा के जाने का शोक थमेगा वैसे ही सियासत शुरु हो जाएगी।

कौन हैं शशिकला

जयललिता को राजनीति में लाने वाले एमजीआर की मौत से जब वह बुरी तरह टूट गई थीं, तब शशिकला ही थीं जिन्होंने उन्हें हिम्मत बंधाई। जया को राजनीति में सही तरीके से स्थापित करने का बड़ा श्रेय शशिकला को ही दिया जाता है। यही वजह है कि अब सबकी नजरें शशिकला पर हैं। शशिकला को करीब से जानने वालों का कहना है कि शशिकाल ने खुद को राजनीति से दूर रखा, लेकिन जया के हर फैसले में उनकी भागीदारी रही। 

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