जान फूंकने वाला हमें छोड़कर चला गया

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नई दिल्‍ली। हिन्‍दी के वरिष्ठ साहित्यकार रवींद्र कालिया का निधन हो गया है। लीवर में शिकायत के बाद बीते दिनों उन्‍हें दिल्‍ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कालिया हाल ही में भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक पद से रिटायर हुए थे।

रवींद्र कालिया

रवींद्र कालिया का जाना

पिछले बुधवार को उनकी हालत में सुधार के बाद उन्हें वेंटिलेटर से बाहर कर दिया गया था। लेकिन आज सुबह एक बार फिर उनकी तबीयत बिगड़ गई। उनकी पत्नी ममता कालिया भी प्रख्यात साहित्यकार हैं। उनकी बीमारी के दौरान उनके पुत्र मनु कालिया उनके साथ थे। उनके निधन के समाचार से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

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रवींद्र कालिया की पहचान ऐसे बेहतरीन संपादक के रूप में थी जो खत्‍म सी हो चुकी पत्रिकाओं में भी जान फूंक देते थे। रवींद्र कालिया उन संपादकों में थे, जो पाठकों की नब्‍ज और बाजार को चाल को बखूबी समझते थे। धर्मयुग में रवींद्र कालिया के योगदान से सारा साहित्य-जगत परिचित है। हाल ही में उन्होंने साहित्य की अति महत्वपूर्ण 31 वर्षों से प्रकशित हो रही ‘वर्तमान साहित्य’ में सलाहकार संपादक का कार्यभार सम्भाला था।

11 नवम्बर, 1939 को जालंधर में जन्मे रवीन्द्र कालिया ने ‘नया ज्ञानोदय’ के संपादन का दायित्व संभालते ही उसे हिंदी साहित्य की अनिवार्य पत्रिका बना दिया। रवीन्द्रजी ने वागर्थ, गंगा जमुना, वर्ष का प्रख्यात कथाकार अमरकांत पर एकाग्र अंक, मोहन राकेश संचयन, अमरकांत संचयन सहित अनेक पुस्तकों का संपादन किया था।

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