जितना बड़ा सोचेंगे भारतीय, उतना ही अपने सपनों से होंगे दूर

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मुंबई। कहते हैं कि बड़े सपने देखने वालों की उपलब्धियां भी बड़ी होती हैं। लेकिन, भारतीयों के आर्थिक मामलों में यह बात खरी उतरती नहीं दिखती। एक सर्वेक्षण से पता चला है कि भारतीय जितने बड़े सपने देखते हैं, उतनी ही खराब वित्तीय योजनाएं बनाने वाले भी होते हैं और नतीजा यह होता है कि उनके हाथ वह कुछ नहीं आता, जो आ सकता था।

सपने

महिलाएं तेजी से बढ़ रही आगे

सर्वेक्षण अविवा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने किया है। इसमें कहा गया है कि नई पीढ़ी बेहतर वित्तीय योजनाएं बनाने वाली है और महिलाएं इस मामले में तेजी से पुरुषों जैसी महारथ हासिल करने की तरफ बढ़ रही हैं। सर्वे देश के आठ शीर्ष शहरों में किया गया।

कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ट्रेवर बुल ने एक बयान में कहा, “आज के भारतीयों के लिए कोई भी सपना बड़ा नहीं है जिनकी चमक वैश्विक स्तर पर बिखरी हुई है। लेकिन, जब जीवन के लक्ष्यों की योजना बनाने की बात आती है, तो अधिकांश भारतीयों के पास इन लक्ष्यों को हासिल करने की कोई ठोस वित्तीय योजना नहीं होती।”

दो हिस्सों में हुआ सर्वे

सर्वे को दो हिस्सों में बांटा गया। एक था ड्रीम इंडेक्स जिसमें यह देखा गया कि भारतीय जीवन के लक्ष्यों के प्रति कितने जागरूक हैं। और, दूसरा था प्लान इंडेक्स, जिसमें आंका गया कि भारतीय अपने इन लक्ष्यों को पाने के लिए कैसी वित्तीय योजनाएं बनाते हैं।

ड्रीम इंडेक्स को 61 अंकों का पाया गया जबकि प्लान इंडेक्स 24 अंक का ही रहा। सर्वे में पाया गया कि 25 से 29 साल की युवा पीढ़ी वित्तीय निवेश के मामले में कुल औसत 24 से बेहतर है। इसे इस मामले में 31 अंक मिले। यह भी पाया गया कि महिलाएं भी वित्तीय योजनाएं बनाने में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पुरुषों के 25 के प्लान इंडेक्स की तुलना में महिलाओं के अंक 19 रहे।

यह भी पाया गया कि बिना बच्चों वाले दंपति बच्चों वाले दंपति से बेहतर वित्तीय योजनाएं बनाते हैं। बिना बच्चों वाले दंपतियों का प्लान इंडेक्स 31 और संतान वाले दंपतियों का प्लान इंडेक्स 21 रहा।  सर्वे 25 से 45 आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं के बीच किया गया

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