जिम में वर्कआउट करने से मर्द नहीं नामर्द हो सकते हैं आप

0

नयी दिल्ली। आजकल जिम में वर्कआउट युवा पीढ़ी का फैशन और पैशन दोनों बन गया है। लेकिन जिम में वर्कआउट करने से क्या कुछ नुकसान हो सकता है आज आपको उसकी जानकारी हम देते हैं। टोन्ड बॉडी और बाईसेप, ट्राईसेप के शौक के चलते ही युवा पीढ़ी बहुत कुछ कर रही है। लेकिन देर तक और गलत तरह से जिम में वर्कआउट, एक्सरसाइज और वेट ट्रेनिंग करना उन्हें इनफर्टिलिटी क्लीनिक्स में पहुंचा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि जिम में जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज और वेट ट्रेनिंग से मर्द के स्पर्म कमजोर होते हैं। दरअसल, ऐसा करने से स्पर्मेटिक कॉर्ड में वैरिकोज वेन्स बढ़ जाती है, जिससे स्पर्म काफी कमजोर होते हैं।

ये भी पढ़ें – रोज नहाना नुकसानदायक, बीमार कर रही ये आदत

जिम में वर्कआउट 2
सांकेतिक

जिम में वर्कआउट पर विशेषज्ञ

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनफर्टिलिटी क्लिनिक्स में आने वाले पुरुषों में से 20 प्रतिशत पुरुष वैरिकोज वेन्स की समस्या के शिकार होते हैं, जिन्हें आखिरकार सर्जरी करवानी पड़ती है। बगैर ट्रेंड ट्रेनर और इंस्ट्रक्शन्स के जिम करना युवाओं को भारी पड़ रहा है।

एक नामचीन हेल्थकेयर में ऐंड्रॉलजी ऐंड मेन्ज हेल्थ के डायरेक्टर के मुताबिक,  ‘इन दिनों युवा अपनी फिटनेस को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। इसके लिए वे सुबह शाम जिम जाते हैं और कई एक्सरसाइज भी करते हैं लेकिन गलत एक्सरसाइज से वे वैरिकोज वेन्स की समस्या का शिकार हो जाते हैं। वैरिकोसल्स से टेस्टिकल्स का टेंपरेचर काफी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से स्पर्म कमजोर पड़ जाते हैं।

ये भी पढ़ें – बेटे के गम में 51 साल की मां बन गई बॉडी बिल्‍डर
जिम में वर्कआउट 3
सांकेतिक

स्पर्मेटिक कॉर्ड का इलाज केवल सर्जरी

मनिपाल हॉस्पिटल में यूरॉलजिस्ट डॉ. आनंद ने बताया, ‘कमजोर स्पर्म इनफर्टिलिटी का कारण बनता है, जिसका इलाज सर्जरी से ही किया जा सकता है।’ डॉ. आनंद का ये भी कहना है कि यह समस्या ज्यादातर शरीर के बाएं हिस्से में होती है, दाएं में नहीं। और इस समस्या का असर दिखने में थोड़ी देर लगती है और लैप्रस्कोपिक प्रोसीजर के जरिए ही इसे सही किया जा सकता है। डॉक्टरों की सलाह है कि पहली बार जिम जाने वाले लोगों को चाहिए कि वे इंस्ट्रक्टर की मदद लें और पूरी गाइडेंस में ही एक्सरसाइज करें। अगर कोई एक्सरसाइज करने के बाद उन्हें कोई समस्या होती है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह भी लें।

बीजी ग्लोबल हॉस्पिटल में यूरॉलजिस्ट और ऐंड्रॉलजिस्ट डॉ. टीवी सेषागिरी के मुताबिक, ‘यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि इस पर कोई ठोस स्टडी अभी भी नहीं की गई है और न ही पर्याप्त क्लिनिकल डाटा मौजूद है। ज्यादा वेट लिफ्टिंग की वजह से पड़ने वाले प्रेशर के कारण यह समस्या पैदा होती है।

जिम शुरू करने से पहले ज्यादातर लोग इंस्ट्रक्टर को फॉलो नही करते और न ही किसी एक्सपर्ट की सलाह लेते हैं। इस वजह से उन्हें छोटी-मोटी अंदरूनी चोटें भी आ जाती हैं। इसका सबसे दुखद पहलू ये है कि कई चोटों का पता बाद में चलता है और वे हमेशा के लिए बनी रहती हैं।

 

loading...
शेयर करें