जिला अस्‍पताल में गजब!

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गोरखपुर। जिला अस्पताल में गजब हो गया। तीन दिन पहले हटाये गये डा. एचआर यादव फिर से जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) बना दिये गये हैं। पद से हटने के बाद वह 6 से 9 जनवरी तक के लिए अवकाश पर चले गये थे लेकिन जब पद मिला तो छुट्टी के दिन चार्ज लेने पहुंच गये। वह भी मंत्री और विधायक की स्टाइल में।

जिला अस्पताल में उनके स्वागत के लिए ढोल-नगाड़ा मंगाया गया था। जब डा. यादव चार्ज लेने पहुंचे तो खूब ढोल बजा और उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया गया। अब इस अफसर की कारस्तानी पूरे गोरखपुर में चर्चा का विषय बन गई है।

जिला

एसआईसी डा. एचआर यादव और विवादों का बहुत पुराना रिश्ता रहा है। पिछले वर्ष कांग्रेस के स्थानीय नेता से विवाद हुआ तो उन्होंने नेता पर मुकदमा दर्ज कराकर उसे जेल भिजवा दिया। जिला अस्पताल में पिछले तीन महीनों से उनका अपने ही कर्मचारियों ने टशन बढ़ गया है। एसआईसी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए राज्य कर्मचारी संगठन से जुड़े नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस लड़ाई में भी मुकदमेबाजी हुई। शिकायतों के अम्बार के बीच एडी हेल्थ डा. आरके तिवारी ने एसआईसी को हटा दिया और डा. बी कुमार को जिला अस्पताल का नया एसआईसी बना दिया था।

जिला अस्‍पताल में तीन दिन में बदल गई सत्ता

एसआईसी डा. एचआर यादव इतने ताकतवर हैं कि महज तीन दिन के भीतर उन्होंने दोबारा कुर्सी पर कब्जा कर लिया। 6 जनवरी को चार्ज लेने वाले डा. बी कुमार को पद से हटाने के बाद ताकत का नंगा नाच भी दिखाया। यूपी में कोई प्रमुख सचिव भी उस स्टाइल में चार्ज लेने नहीं जाता जैसे कि एसआईसी ने लिया। इस तेवर से जिला अस्पताल के वे कर्मचारी खौफ में हैं जिन्होंने डा. यादव की शिकायत की थी।

एडी हेल्थ ने जताई अनभिज्ञता

जब इस सम्बन्ध एडी हेल्थ डा. आरके तिवारी से बात की गई तो उन्होंने पूरे प्रकरण से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं आती, तब तक इस मसले पर हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।

नगर विधायक बोले-अफसर बन गये हैं नेता

गोरखपुर शहर के विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल ने ऐसी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। इस पूरे प्रकरण के बारे में जानकारी देकर जब उनसे सवाल किया गया तो उनका कहना था कि सपा शासनकाल में पूरे तंत्र का राजनीतिकरण हो गया है। इस बात का अफसरों के मनो-मष्तिस्क पर गहरा असर पड़ा है। अफसर अपने आप को अधिकारी कम नेता ज्यादा समझने लगे हैं। यह नहीं होना चाहिए।

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