मोदी सरकार ने मानी कांग्रेस की बात, 1% GST टैक्स को दी मंजूरी

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नई दिल्‍ली। जीएसटी बिल पास कराने के लिए मोदी सरकार को झुकना पड़ा। सरकार ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) संविधान संशोधन विधेयक में कुछ प्रमुख बदलावों को बुधवार को मंजूरी दे दी। राज्यों को एक प्रतिशत अतिरिक्त विनिर्माण कर लगाने संबंधी प्रावधान हटा लिया गया है। इसके साथ ही जीएसटी अमल में आने के पहले पांच साल के दौरान राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई की गारंटी पर भी मंत्रिमंडल ने मुहर लगा दी है। यह सिफारिश कांग्रेस ने की थी।

जीएसटी बिल

जीएसटी बिल को मोदी सरकार ने दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ये निर्णय लिये गये। राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बिल पर सहमति बनाने के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों से बातचीत शुरू कर दी है। अब बिल का अंतिम खाका तैयार करने के लिए वित्त मंत्री इस हफ्ते लेफ्ट नेताओं के साथ-साथ छोटे दलों से भी मुलाकात करेंगे। कांग्रेस के साथ अनौपचारिक बैठकें हो चुकी हैं।

कांग्रेस की तीन में से एक मांग पूरी

विधेयक में एक प्रतिशत अंतर-राज्यीय कर को खत्म कर सरकार ने कांग्रेस की तीन में से एक मांग को मान लिया है। कांग्रेस की दो अन्य मांगों पर कोई पहल नहीं हुई है। कांग्रेस की मांग है कि जीएसटी की अधिकतम दर का संविधान में उल्लेख किया जाए और कर विवाद का निपटारा सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश की अध्यक्षता वाली संस्था करे, जबकि सरकार का कहना है की यह प्रावधान संविधान संशोधन नहीं, बल्कि जीएसटी एक्ट में शामिल किया जा सकता है।

क्या है जीएसटी

सामान्य शब्दों में कहा जाए तो जीएसटी के तहत पूरे देश में सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा। पूरे देश में एक ही चीज़ की एक ही कीमत होगी। सर्विस टैक्स, वैल्यू एडेड टैक्स, इंटरटेनमेंट टैक्स, लक्जरी टैक्स, जीएसटी ऐसे ही सारे टैक्स का इलाज है। कारोबारियों को भी बाहर से सामान मंगवाने पर अलग अलग टैक्स देना पड़ता है। इससे वो भी बचेंगे और चीजें सस्ती मिल पाएगी।

 

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