जीका वायरस से बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके

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जीका वायरस के संभावित खतरे से निपटने के लिए कमर कस लीजिए। यह जानलेवा बीमारी कभी भी भारत पर हमला कर सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि जीका वायरस विस्फोटक तरीके से आगे बढ़ रहा है और इससे भारत जैसे देश प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि जीका वायरस से बचाव के तरीके जान लिए जाएं।

जीका वायरस से बचाव

जीका वायरस से बचाव और लक्षण

जीका विषाणु से संक्रमित होने पर बुखार, त्वचा पर चकत्ते और आंखों में जलन, मांसपेशी और जोड़ों में दर्द की परेशानी होती है। यह लक्षण आमतौर पर 2 से 7 दिनों तक रहते हैं। जीका वायरस से बचाव करना मुश्किल होता है।

संक्रमण

यह एडीज एजिप्ती मच्छर के काटने से फैलता है। यही मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया और पीत ज्वर के लिए जिम्मेदार होता है।

बचने के उपाय

जीका वायरस से बचाव के लिए जरूरी है कि मच्छरों से दूर रहा जाए। मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढक कर रखें और हल्के रंग के कपड़े पहनें। इसके अलावा, कीड़ों से बचाने वाली क्रीम और मच्छरदानी का उपयोग करें। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए अपने घर के आसपास गमले, बाल्टी, कूलर आदि में भरा पानी निकाल दें।

इलाज

वर्तमान में जीका वायरस से बचाव ही इसका इलाज है। इस बीमारी का कोई टीका उपलब्ध नहीं है। जीका वायरस से संक्रमण से संबंधित लक्षण नजर आने पर दर्द और बुखार की सामान्य दवाइयों के साथ अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन और भरपूर आराम करना चाहिए।

जीका वायरस का प्रकोप

जीका वायरस से संक्रमित हर पांच में से एक व्यक्ति में ही इसके लक्षण दिखते हैं। आम तौर पर संक्रमित व्यक्तियों के जोड़ों में तेज दर्द, आंखें लाल होना, मतली, चिड़चिड़ापन या बेचैनी इसके लक्षण होते हैं। जीका वायरस का पहला मामला युगांडा में 1947 में दर्ज हुआ था। साल 2015 तक यह वायरस अफ्रीका, एशिया और प्रशांत द्वीपों में ही सुप्त अवस्था में पाया गया। अब तक 14 देशों में जीका वायरस का पता चला है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने चेतावनी दी है कि जीका वायरस के कारण बच्चों में जन्मजात माइक्रोसिफेली दोष आ सकता है। इससे प्रभावित बच्चों का सिर छोटा रह जाने से उनके मस्तिष्क में स्थाई दोष आ जाता है।

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