मानवाधिकार आयोग: सेना की जीप से बंधे युवक को दस लाख का मुआवजा दे सरकार

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श्रीनगर। सेना के जवान द्वारा एक आदमी को जीप से बांधने वाला मुद्दा खूब उछला था। सोमवार को इस मामले में एक नया मोड़ आ गया। जम्‍मू-कश्‍मीर मानवाधिकार ने सोमवार को राज्‍य सरकार को आदेश दिया है कि जीप से बंधे युवक फारुक अहमद डार को दस लाख का मुआवजा दे।

जीप से बंधे युवक फारुक अहमद डार को दस लाख का मुआवजा

जीप से बंधे युवक फारुक अहमद डार को दस लाख का मुआवजा मिलने से होगा विवाद

फारुक अहमद डार वही हैं, जिन्हें पत्थरबाजों से निपटने के लिए सेना जीप के बोनट से बांधकर ढाल की तरह इस्तेमाल किया था। घाटी में पत्थरबाजों के बीच घिरे सेना के जवानों को बचाने के लिए मेजर नितिन लितुल गोगोई ने डार को जीप के बोनट से बांधने का फैसला लिया था।

इस मामले ने पकड़ा था तूल

मेजर के इस फैसले के बाद विवाद मच गया था। सियासी पार्टियों के साथ बौद्धिक वर्ग ने भी मेजर गोगोई के फैसले पर सवाल उठाया था। हालांकि विवादों के बीच सेना प्रमुख बिपिन रावत ने मेजर गोगोई का खुलकर समर्थन किया था और कहा था कि जवानों को पत्थरबाजों के बीच मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। मेजर और सेना प्रमुख को केंद्र सरकार और बीजेपी का भी पूरा समर्थन मिला।

सेना ने किया था मेजर गोगोई का सम्मान

फारूक अहमद डार को जीप के बोनट से बांधने की घटना के तकरीबन दो हफ्ते बाद सेना ने मेजर गोगोई को इस फैसले के लिए सम्मानित किया। मेजर गोगोई को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए थलसेना अध्यक्ष की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया था वीडियो

कश्मीरी युवक को जीप के आगे बांधने की ये घटना 9 अप्रैल की है। इस घटना का वीडियो क्लिप उमर अबदुल्ला ने ट्वीट कर जांच की मांग की थी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और इसके खिलाफ भारतीय सेना की काफी आलोचना भी हुई थी। हालांकि कुछ लोगों ने सेना की इस कार्रवाई का समर्थन भी किया था।

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