ऐसी विचारधारा रखने वालों की जगह जेल होनी चाहिए

0

जेएनयूदेवेश सिंह।

देश की अस्मिता पर आँच आये ऐसी अभिव्यक्ति की आजादी का मैं पुरजोर विरोध करता हूं। भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की बात करने वाले किस विचार धारा की बात कर रहे हैं। देश के खिलाफ नारा लगाने वाली आवाजों की जगह वाकई में जेल में होनी चाहिए। जेएनयू में जो कुछ हुआ देश को शर्मसार करने वाला है। मामले को राजनीतिक रंग दे दिया गया है, राजनीतिक पार्टियां रोटी सेंकने के लिए लालायित हैं। अभी तक देश विरोधी नारे लगाये जाने वाले छात्रों पर सरकार की ओर से कार्रवाई न किये जाने की बात कही जा रही थी अब जब पुलिस ने छात्र नेता को गिरफ्तार कर लिया है तो इसे जेएनयू की स्वायत्ता से जोड़ा जाने लगा है।

जेएनयू हमेशा से ऐसी घटनाओं का गवाह

जेएनयू में इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं, लेकिन हर बार जेएनयू प्रशासन इंटरनल कमेटी बनाकर मामले को रफा-दफा करता रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार ने सीधे तौर पर मामले का संज्ञान लेते हुए हस्तक्षेप किया है। और करना भी चाहिए क्योंकि जब बात देश की हो तो चुप नहीं बैठा जा सकता। मैं जेएनयू के काबिल फैकल्‍टी से पूछना चाहता हूं आखिर नौबत यहां तक आई कैसे? क्या उनका इन भटके छात्रों के प्रति कोई दायित्व नहीं बनता? एशिया के सबसे टाॅप संस्थानों में शुमार हर छात्र का सपना होता है कि वह वहां से तालीम हासिल करे लेकिन वहां तक पहुंचते वही है जो वाकई में विशुद्ध रूप से मेधावी होते हैं।

जेएनयू एक स्वायत्त संस्था है जनता के दिये टैक्स से इसका संचालन होता है फिर जनता कैसे बर्दाश्त कर सकती है अपने देश के विरोध में लगे नारों को। आज बात हो रही है युवा विचार धारा की….मानता हूं नई विचार धारा के लोग आने चाहिए, खुल कर बहस होनी चाहिए लेकिन उन मुद्दों पर जिनसे जनता का सरोकार हो। अपने ही देश में रहकर अपने ही देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात करना कहां की विचार धारा है। मालूम हो सांड बेलगाम हो जाता है तो उसको काबू में करने के लिए नकेल डालनी पड़ती है ठीक वैसे ही इन सिर फिरे छात्रों को दुरूस्त करने के लिए सरकार व जेएनयू प्रशासन को कुछ ऐसा करना चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दुबारा न हो सकें।

loading...
शेयर करें