जेएनयू छात्रों के सामने झुका प्रशासन, विचार के लिए बनी समिति

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जेएनयूनई दिल्ली। जेएनयू में नौ फरवरी को एक कार्यक्रम के दौरान काफी विवाद हुआ था। इस सिलसिले में सजा मिलने के खिलाफ छात्रों ने अपनी मांग को लेकर भूख हड़ताल किया है। जिसके बाद छात्रों की मांग पर विचार के लिए एक चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। भूख हड़ताल से तीन छात्रों की हालत काफी बिगड़ गई।

जेएनयू की तरफ से आया बयान

जेएनयू के तीन छात्रों की हालत ख़राब होने के बाद उनहोने अपना अनशन खत्म कर दिया। जेएनयू ने एक बयान देते हुए कहा कि कुलपति ने रेक्टर-1, रेक्टर-2, छात्रों के डीन और रजिस्ट्रार की सदस्यता वाली एक टीम बनाने का फैसला किया है। जो भूख हड़ताल कर रहे छात्रों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर विचार करेगी।

बयान में कह गया कि सिर्फ शांतिपूर्ण वार्ता और चर्चा के जरिए ही समाधान तलाशे जा सकते हैं और ऐसे कदमों से नहीं जिससे किसी की सेहत और परिसर के शैक्षणिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो। प्रशासन छात्रों से एक बार फिर अपील करता है कि वे अपनी भूख हड़ताल खत्म करें और अपनी मांगों पर चर्चा के लिए आगे आएं। वहीं छात्र संघ ने कहा कि प्रशासन से वार्ता करने या न करने के मुद्दे पर उसने अभी फैसला नहीं किया है।

सेहत बिगड़ने से ख़त्म किया भूख हड़ताल

इस बीच तीन छात्रों- उमर खालिद, प्रतिम घोषाल और पार्थीपन ने अपनी सेहत बिगड़ने के बाद भूख हड़ताल खत्म कर ली। राजद्रोह के मामले में जमानत पर रिहा किए गए उमर को प्रशासन ने एक सेमेस्टर के लिए निष्कसित कर दिया है। उसे सोमवार तड़के तब एम्स में भर्ती कराया गया जब उसका शुगर और सोडियम-पोटाशियम स्तर काफी गिर गया।

अब तक जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित नौ छात्र अनशन खत्म कर चुके हैं जबकि 11 अन्य छात्र अब भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनके अनशन को आज 13वां दिन है।

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