जेल में ही रहेंगे बाहुबली मुख्तार अंसारी, दिल्ली हाईकोर्ट ने परोल पर लगाई रोक

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लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव का संग्राम जोरों पर है। इसी संग्राम के एक खिलाड़ी का नाम बाहुबली मुख्तार अंसारी है जो जेल से ही चुनाव लड़ रहें हैं। हाल ही में चुनाव प्रचार के लिए उन्हें पेरोल मिली थी जिसे हाईकोर्ट ख़ारिज कर दिया है। यूपी में बहुजन समाज पार्टी के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी की परोल के लिए कांग्रेस के दो बड़े नेता कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं।  मुख्तार अंसारी जिस मऊ से उम्मीदवार हैं वहां चार मार्च को वोटिंग है।

मुख्तार अंसारी

मुख्तार अंसारी मऊ से उम्मीदवार हैं, 4 मार्च को होनी है वोटिंग

उल्लेखनीय है कि निचली अदालत ने चुनाव प्रचार करने के लिए 4 मार्च तक पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया गया था। इसी पर चुनाव आयोग ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर स्टे लगा दिया है। चुनाव आयोग ने अपने अपील में कहा था कि मुख्तार अंसारी चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।

कौन हैं मुख़्तार अंसारी

पूर्वांचल में अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह मुख्तार अंसारी मऊ, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर में कुख्तार अपराधी के तौर पर जाने जाते थे। लेकिन अपराध की दुनिया के साथ ही उन्होंने 1995 में राजनीति की दुनिया में भी कदम रखा और 1996 मे विधायक बनें।

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इस दौरान भी अंसारी और बृजेश सिंह में खूनी संघर्ष जारी रहा, अंसारी की एक रैली पर बृजेश सिंह धावा भी बोल दिया था। इस दौरान गोलीबारी में अंसारी के तीन लोगों की मौत हो गई थी, बृजेश सिंह बुरी तरह से घायल हो गया था और माना जा रहा था कि उसकी मौत हो गई है

कई हत्याओं का मास्टरमाइंड रहें हैं अंसारी

जिस वक्त अंसारी जेल में था उस वक्त कृष्णानंद राय और उसके छह सहयोगियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने एके 47 से 400 राउंड गोलियां चलाई थी। सात शव से 67 गोलियां मिली थी। इस मामले में मुख्य गवाह शशिकांत राय की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। हालांकि पुलिस ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया। इस हत्याकांड के बाद बृजेश सिंह फरार हो गया।

मुख्तार अंसारी 2007 में पहली बार बसपा विधायक बने अपने ऊपर लगे हर आरोपों से अंसारी ने इंकार किया था। उसके बाद मायावती ने उन्हें गरीबों का मसीहा बताया। यह वही दौर था जब अंसारी की छवि रॉबिन हुड के तौर पर स्थापित हुई थी। अंसारी ने 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ा, उस वक्त भी वह जेल में थे, लेकिन वह भाजपा के मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ हार गया।

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