पीएम मोदी से बीफ बैन की मांग करने वाले इस ‘अल्लाह के बंदे’ को मिली इतनी बड़ी सज़ा

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अजमेर। हाल ही में अजमेर दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन ने पीएम मोदी से मांग की थी कि पूरे देश में बीफ बैन करें। जिसके एक दिन बाद ही दीवान पर बड़ी मुसीबत आ गई। इस बयान की वजह से सूफी जैनुल के भाई अलाउद्दीन आलिमी ने उन्हें दरगाह के दीवान पद से हटाने का ऐलान किया है। उन्होंने जैनुल को हटाकर खुद को दरगाह का दीवान घोषित कर दिया। इतना ही नहीं पीएम मोदी से गोमांस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले सूफी संत जैनुल आबेदीन ने तीन तलाक को भी इस्लाम विरोधी बताया था।

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जैनुल आबेदीन

क्या कहा था जैनुल आबेदीन ने

उन्होंने कहा था कि उनके पूर्वज ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती ने इस देश की संस्कृति को इस्लाम की नियमों के साथ अपना कर मुल्क में अमन-शान्ति और मानव सेवा के लिये जीवन सर्मपित किया। उसी तहजीब को बचाने के लिये गरीब नवाज के 805 उर्स के मौके पर वह और उनका परिवार बीफ के सेवन त्यागने की घोषणा करता है। वह हिन्दुस्तान के मुसलमानों से यह अपील करते हैं कि देश में सद्भावना के पुनस्थार्पन के लिये इसको त्याग कर मिसाल पेश करें।

सूफी मौलवियों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि पीएम नरेंद्र मोदी को करोड़ों मुसलमानों को राहत देते हुए इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए और बीफ को बैन करने के लिए अध्यादेश पारित होना चाहिए। दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह के अलावा कर्नाटक के गुलबर्गा शरीफ, आध्र प्रदेश के हलकट्टा शरीफ और नगौर, बरेली, कलियार, भागलपुर, जयपुर और फुलवारी जैसी दरगाहों के मौलवियों ने भी इस मांग का समर्थन किया था।

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तीन तलाक पर भी दिया था बयान

दरगाह दीवान ने कहा था कि कुरान में तलाक के मामले में भी इतनी बंदिशें लगाईं गई हैं कि अपनी बीवी को तलाक देने के पहले मर्दों को सौ बार सोचना पड़े। कुरान में तलाक को न करने लायक काम बताते हुए इसकी प्रक्रिया को कठिन बनाया गया है। कुरान कहता है कि तीनों तलाक कहने के लिए एक-एक महीने का वक्त लिया जाना चाहिए। कुरान एक बार में तीन तलाक कहने की परंपरा को जायज नहीं मानता है।

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