अगर अजहर मसूद को बचाएगा चीन तो भारत लेगा बदला, फैसला इसी हफ्ते

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नई दिल्ली: अब वह घड़ी आ गई है जब चीन को यह साफ़ करना होगा कि वह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर  को बैन करने की भारत की मांग पर मोहर लगाती है या फिर उसके खिलाफ ही खड़ी होती है। भारत अपना अगला कदम चीन के इस फैसले के बाद ही बढ़ाएगा। साथ ही इस फैसले से भारत-चीन के आगे के संबंध भी साफ हो जायेंगे।

जैश-ए-मोहम्मद

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद को लेकर होने वाला है बहुत बड़ा फैसला 

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के समक्ष भारत ने अजहर मसूद और जैश ए मोहम्मद को बैन करने की मांग की थी लेकिन चीन ने इसका जमकर विरोध किया था। तब से यह मामला यूएन के समक्ष ‘टेक्नीकल होल्ड’ पर है। चीन के पास इस मामले में अपना रुख साफ़ करने के लिए इस हफ्ते के आखिर तक का समय है।

जानकारों का कहना है कि चीन के पास इस मामले को लेकर दो रास्ते हैं। अगर वह समय से पहले भारत के प्रस्ताव पर लगे होल्ड को आगे नहीं बढ़ाता तो इसे निरस्त होने देता है तो भारत के प्रस्ताव पर अपने आप मोहर लग जायेगी। साथ ही जैश ए मोहम्मद भी आतंकी संगठनों की सूची में शामिल हो जाएगा।

वहीं अगर चीन अजहर मसूद पर लगाए अक्पने होल्ड को ब्लॉक कर देता है तो भारत की सभी उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा और उसका यह प्रस्ताव खारिज कर दिया जाएगा। चीन के इस फैसले से यह भी साफ़ हो जाएगा कि वह पाकिस्तान के समर्थन में पूरी तरह से है या नहीं।

इसके पहले भारत ने चीन के साथ इस मुद्दे को लेकर बातचीत भी की है। अजहर मसूद को लेकर इसी वर्ष पांच नवंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने चीन के रक्षा सलाहकार यांग जिएची बैठक की थी। इस बैठक में चीन ने यह साफ कर दिया था कि वह मसूद अजहर पर अपना फैसले बदलने वाला नहीं है। हालांकि विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया था कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते आतंकवाद को लेकर गंभीर हैं।

आपको बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर पंजाब के पठानकोट स्थित एयरफोर्स बेस पर इस साल की शुरुआत में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है। भारत ने इस साल 31 मार्च को संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, जिसमें चीन ने अड़ंगा लगा दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 देशों के समूह में अकेला चीन ही ऐसा था, जिसने अजहर को आतंकी घोषित किए जाने के फैसले को ‘होल्ड’ पर रखा था। इस वजह से भारत की जैश-ए-मोहम्मद पर बैन लगाने की योजना भी नाकामयाब हो गई थी।

अगर भारत के इस प्रस्ताव पर यूएन की मोहर लग गई तो इससे आतंकवाद और पाकिस्तान दोनों को गहरा झटका लगा था।

 

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