झांसी की रानी का खुलासा- बहुत गंदी है ये इंडस्ट्री, लड़कियों में टैलेंट नहीं ये देखकर रोल देते हैं प्रोड्यूसर

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मुंबई। सीरियल ‘झांसी की रानी’ में मनु (लक्ष्मीबाई) के बचपन का रोल कर चुकीं उल्का गुप्ता अब बड़ी हो गई हैं। हाल ही में उल्का ने टीवी इंडस्ट्री को लेकर कुछ हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं। उल्का का कहना है कि टीवी इंडस्ट्री में टैलेंट को कम और गोरे रंग को ज्यादा महत्व दिया जाता है।

उल्का ने अपने साथ होने वाले कुछ अनुभवों को शेयर करते हुए बताया,  “मुझे एक्टिंग का बहुत शौक है और बचपन से ही मैं इंडस्ट्री के डार्क साइड को फेस करती आ रही हूं। ‘रेशम डंक’ के रैपअप के बाद मैं पापा के साथ रोज ऑडिशन के लिए जाती थी और हर बार मुझे निराश होना पड़ता था। क्योंकि प्रोड्यूसर्स को एक फेयर लड़की की जरूरत होती थी। उनका मानना था कि फेयर लड़की अप मार्केट गर्ल होती है। डार्क स्किन की वजह से मुझे कई बार रिजेक्ट कर दिया गया। इनफैक्ट कॉम्पलेक्शन के कारण मुझे ‘सात फेरे’ में सलोनी की बेटी का रोल मिला था। इस शो के लिए मेकर्स ने डार्क कलर की बजाय लड़की के साहस पर फोकस किया। सरप्राइजिंगली, कई सालों बाद भी मेरे कास्टिंग एजेंट के पास रिक्वायरमेंट्स आते हैं और उनमें लिखा रहता है, “फेयर लड़की चाहिए।” ईमानदारी से कहूं तो मैंने ऐसे ऑडिशन में जाना बंद कर दिया। फेयर होने से कोई अपमार्केट नहीं दिखता। मैं चाहती हूं कि कलर की बजाय मेरा टैलेंट बोले।”

 अनप्रोफेशनल होने का लगा आरोप

सात फेरे के बाद उल्का को झांसी की रानी में मनु का रोल मिला, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। झांसी की रानी के बाद उन्हें ‘खेलती है जिंदगी आंख मिचोली’ में काम मिला लेकिन वहां उनपर अनप्रोफेशनल होने के आरोप लगा जिसके बाद उन्होंने शो छोड़ दिया और तय किया अब वो डेली सोप नहीं करेंगे। उल्का अब बड़े पर्दे पर काम करना चाहती हैं। वो एक तमिल फिल्म में नज़र आ चुकी हैं और एक हिंदी और मराठी फिल्म में नज़र आने वाली हैं। वो चाहती है कि रंग भेद को किनारे कर टैलेंट के दम पर उनको आंका जाए।

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