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टिहरी झील बनी कुछ गांवों के लिये अभिशाप

देहरादून। विकास का प्रतीक माना जाने वाले टिहरी डैम की टिहरी झील आसपास के लोगों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। टिहरी झील के पानी में उपजाऊ भूमि डूबने के बाद लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, जिससे पलायन बढ़ गया है और गांव खाली होते जा रहे हैं। शासन ने कहने को तो कई गांवों को विस्थापित किया, लेकिन अभी भी कई गांव ऐसे हैं जो विस्थापन का इंतजार कर रहे हैं।

टिहरी झील प्रभावित भिलंगना और भागीरथी घाटी के करीब 550 परिवार झील के पानी के उतार चढ़ाव के चलते भूस्खलन और भूधसावं की मार झेल रहे हैं। आंशिक डूब क्षेत्र में आने वाले तिवाड़, उप्पू, सिराई, चोपड़ा, रामगांव और पनेथ गांव तो ऐसे हैं जो पलायन के कारण खाली होने की कगार पर पहुंच गये हैं।

टिहरी झील 2

टिहरी झील प्रभावितों को है विस्थापन का इंतजार

ग्रामीणों की रोजी रोटी का गुजारा यहां खेती करके होता था लेकिन झील के पानी में उपजाऊ भूमि डूबने के बाद लोगों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है। सफेद तिल और लाल चावल के लिए जाना जाने वाला तिवाड़ गांव में आज बंजर भूमि ही बच गयी है। यहां रह रहे लोग बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा कर रहे हैं। विस्थापन की मांग को लेकर धरने प्रदर्शन से लेकर शासन और प्रशासन के कई चक्कर काट चुके ग्रामीण अब हताश हो चुके हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है पूर्ण डूब क्षेत्र वालों के लिए तो सरकार ने पुर्नवास नीति बनाई, लेकिन आंशिक डूब क्षेत्र वालों के लिए आज तक कोई नीति ही नहीं बनाई गयी। झील प्रभावित गांवों के विस्थापन के लिए शासन ने एक्सपर्ट कमेटी की टीम भी गठित की है जो गांवों का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट शासन को देती है।

टिहरी झील 3

आंशिक डूब क्षेत्र के तिवाड़ गांव के लोगों का कहना है कि कई बार टीम द्वारा सर्वे भी किया गया और ग्रामीणों को विस्थापन का आश्वासन भी मिला, लेकिन विस्थापन की कार्रवाई अभी तक नहीं हुई।

पूरे मामले में पुर्नवास निदेशक ज्योति नीरज खैरवाल का कहना है कि, विस्थापन की कार्रवाई शासन स्तर पर होनी है। विभाग द्वारा बहुत जल्द आंशिक डूब क्षेत्र के गांवों का सर्वे नये सिरे से कराया जाएगा और शासन को रिपोर्ट भी भेजी जाएगी।

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