डरा रहा है परमाणु आतंकवाद का खतरा

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वाशिंगटन। ब्रसेल्स और अन्य जगहों पर हुए आतंकवादी हमलों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने आसन्न परमाणु आतंकवाद के खतरे की छाया में परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रौद्योगिकी के विकसित होने के साथ परमाणु आतंकवाद का खतरा भी बढ़ रहा है। यह एक गंभीर वास्तविकता है। वाशिंगटन में हो रहे दो दिवसीय परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन (एनएसएस) में 50 से अधिक देशों के नेता और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख परमाणु आतंकवाद के इसी खतरे से निपटने पर चर्चा करेंगे।

परमाणु आतंकवाद सम्मलेन में सुरक्षा पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2010 में एनएसएस की शुरुआत की थी और यह इस कड़ी में चौथा और संभावित रूप से आखिरी सम्मेलन है। इसमें परमाणु सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। यह ऐसे मौके पर हो रहा है जब आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के भयावह पंजे मध्य पूर्व से बाहर निकल कर यूरोप के भीतर तक पहुंच गए हैं। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में पिछले सप्ताह हुए विस्फोटों में 35 लोगों की मौत हो गई थी और 300 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इससे पहले नवंबर 2015 में पेरिस में हुए सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिसमें 130 लोगों की मौत हो गई थी।

सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि एक अपुष्ट रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रसेल्स धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों ने एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र में इसकी योजना बनाई थी। इससे इस खतरे को महसूस किया जा रहा है कि आतंकी परमाणु हथियारों की दुनिया तक पहुंच सकते हैं। आईएस अन्य आतंकवादी संगठनों की तुलना में अधिक नियुक्तियां कर रहा है। वह प्रशिक्षण में अधिक धनराशि का इस्तेमाल कर रहा है, जो विश्व के लिए खतरे की घंटी है।

हार्वर्ड जॉन एफ. केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के परमाणु सुरक्षा के विशेषज्ञ मैथ्यू बन के मुताबिक, “मैं इसे एक संभावित खतरे के रूप में देखता हूं।” बन ने कहा कि एक वीडियो में दिखाई दे रहा है कि आईएस के आतंकवादी ने कई घंटों तक बेल्जियम के परमाणु संयंत्र में एक वरिष्ठ कर्मचारी पर नजर रखी। यह परमाणु मामलों के संदर्भ में आईएस की मंशा का चिंताजनक संकेत है। इस वीडियो से जुड़े तीन लोगों के पेरिस और ब्रसेल्स हमलों से तार जुड़े हैं। न्यूयॉर्क स्थित एशिया सोसाइटी की वैश्विक परिषद के सदस्य और चीन के फूडान विश्वविद्यालय के परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञ शेन डिंगली के मुताबिक, “इस तरह के आतंकवादी खतरों की घटनाओं में वृद्धि की संभावना की वजह से एनएसएस को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है।”

इस दो दिवसीय सम्मेलन में आईएस पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शहरी केंद्रों में सुरक्षा बढ़ाने और रासायनिक एवं रेडियोधर्मी सामग्री तक आतंकवादी संगठनों को दूर रखने जैसे मुद्दे शामिल होंगे। अमेरिका सहित कई देशों की सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, यदि आईएस जैसे चरमपंथी समूह उच्च संवर्धित यूरेनियम और प्लूटोनियम तक पहुंच बनाने में कामयाब हो जाते हैं, तो वे अपरिष्कृत ही सही लेकिन घातक परमाणु बम बना सकते हैं। शेन ने कहा कि फिलहाल आईएस परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है। लेकिन, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह परमाणु बम बनाने में सक्षम न हो। इसलिए यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी पहुंच अस्पतालों व अन्य जगहों पर उपलब्ध रेडियधर्मी पदार्थ तक न हो सके। उन्होंने कहा कि परमाणु सुरक्षा का संबंध सिर्फ परमाणु सामग्रियों की ही सुरक्षा से नहीं होता बल्कि यह परमाणु इकाइयों की सुरक्षा से भी संबद्ध है।

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