अब CMO नहीं, बल्कि DM लगाएंगे डॉक्टरों की छुट्टी पर मुहर

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डीएमदेहरादून। उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में अब डॉक्टरों की छुट्टी की अर्जी पर अब जनपदों के सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) नहीं बल्कि डीएम के पास करेंगे। पहाड़ी क्षेत्र में डॉक्टरों की छुट्टियों पर लगाम लगाने के लिए ऐसा किया जाएगा।

डीएम की भूमिका तय करेगी सरकार

छुट्टी के साथ स्थानांतरण को लेकर भी सरकार डीएम की भूमिका तय कर रही है। सीएम के आदेश पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने दोनों प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री से अनुमोदन के लिए फाइल भेज दी है। आदेश 9 पर्वतीय जनपदों के साथ मैदानी जनपदों के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी होगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी देखते हुए सरकार फिर सख्ती के मूड में है। डाक्टरों को छुट्टी पर जाने के लिए जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य की जा रही है। फिलहाल व्यवस्था मानसून सीजन के लिए बनाई जा रही है।

इसी के साथ स्थानांतरण सीजन शुरू होने पर पहाड़ से किसी भी डॉक्टर को तभी स्थानांतरित किया जाएगा। जब उसका प्रतिस्थानी उपलब्ध होगा। यहां भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधिकार को डीएम में निहित कर दिया है। बिना प्रतिस्थानी के कोई चिकित्सक दुर्गम में तैनाती नहीं छोड़ सकता है।

एक तरफ सरकार पहाड़ से मैदान में मेडिकल स्टॉफ को स्थानांतरित करने को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर रही है। तो दूसरी ओर करीब 18 फार्मासिस्टों को पर्वतीय जिलों से मैदानी जिलों में तैनात करने का प्रस्ताव तैयार किया है। डाक्टरों की कमी के कारण पहाड़ में फार्मासिस्टों के भरोसे ही मेडिकल सेवाएं संचालित हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों को कमी को देखते हुए जिलाधिकारी को छुट्टी और स्थानांतरण आदेशों के अनुपालन में अधिकृत करने का प्रस्ताव तैयार किया है। चिकित्सक सीएल तभी ले सकेंगे जब डीएम स्वीकार करेंगे।

ऐसा माना जा रहा है कि इस तरह से डॉक्टरों को छुट्टी न देने से उनकी समस्या दूर हो सकती है। लेकिन इस फैसले से प्रदेश के डॉक्टरों में नाराज़गी साफ देखने को मिल रही है।

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