इस डॉक्टर के लिए कुछ भी कर सकते हैं लोग

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डॉक्टरदेहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों पर नौकरी के लिए कोई नहीं जाना चाहता है। वहीं एक डॉक्टर ऐसे हैं। जिन्हें वहां के लोगों से प्यार हो गया है और वह वहां से जाना ही नहीं चाहते हैं। वहां के लोग भी उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। उनका कई बार तबादला हुआ लेकिन वहां की जनता रोड पर प्रदर्शन करने लगी जिसे देखते हुए उनका तबादला रोकना पड़ा।

डॉक्टर की कमी देख वहां पहुंचे डॉ. पाल ने डॉ. शर्मा

उत्तराखंड में चिकित्सकों के कुल 2690 पद हैं और इनमें से आधे से ज्यादा 1588 पद रिक्त चल रहे हैं। गढ़वाल मंडल के पांच पहाडी जिलों पौड़ी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी और चमोली पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। इन पांचों जिलों में चिकित्सकों के 987 पदों के सापेक्ष महज 301 डॉक्टर ही तैनात हैं।

चमोली जिले की हालत और खराब है। यहां चिकित्सकों के 173 पद मंजूर हैं, लेकिन कार्यरत हैं सिर्फ 60 चिकित्सक। आलम यह है जिले में सर्जन के नौ पद हैं, मगर डॉ. शर्मा यहां एकमात्र सर्जन हैं।

डॉ. पाल ने डॉ. शर्मा को पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत से रूबरू कराया। डॉ. शर्मा बताते हैं कि डॉ. पाल ने यहां की बदहाली का जो दृश्य खींचा उसने मेरे दिलोदिमाग पर गहरा असर डाला। बस उन्होंने तय कर लिया कि वह यहीं रहकर काम करेंगे। वर्ष 1992 में उन्हें कर्णप्रयाग में तैनाती मिल गई।

वह बताते हैं कि कर्णप्रयाग तक का सफर आसान नहीं था। बस में कई बार उल्टियां हुईं। स्वस्थ होने में लंबा समय लगा। वह कहते हैं ‘जैसे-जैसे समय बीतता गया मैं पहाड़ का दर्द महसूस करने लगा।’

 

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