मीनोपॉज के बाद भी जियें बिंदास जिंदगी

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आगरा। साउथ एशिया मीनोपॉज सोसायटी की प्रेसीडेंट इलेक्ट व इंडियन मीनोपॉज सोसायटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ जयदीप मल्होत्रा को ब्रिटिश मीनोपॉज सोसायटी की कांफ्रेंस में आमंत्रित किया गया। 5 और 6 जुलाई को वारविक में हुई कांफ्रेंस में डॉ जयदीप ने मीनोपॉज में हार्मोन थैरपी पर रिपोर्ट पेश की।  वे एकमात्र भारत की तरफ से स्पीकर के रूप में शामिल होंगी। जबकि भारत से कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए 7 डॉक्टरों को आमंत्रित किया गया है।

डॉ जयदीप मल्होत्रा को ब्रिटिश मीनोपॉज सोसायटी की कांफ्रेंस में आमंत्रित किया गया

डॉ. जयदीप ने बताया कि मात्र 5 फीसदी महिलाएं ही मीनोपॉज के दौरान डॉक्टर से सम्पर्क करती हैं। यानि लगभग 95 फीसदी महिलाएं मीनोपॉज के दौरान होने वाले प्रतिकूल बदलावों के साथ लगभग एक तिहाई जिंदगी गुजार देती हैं, जिसका असर (चिड़चिड़ापन, नींद न आना, याद्दाश्त कमजोर आदि) परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पड़ता है। डॉ. जयजीप ने बताया हार्मोन थैरपी के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि आज ऐसे कई साधन हैं, जिससे मीनोपॉज के दौरान होने वाले प्रतिकूल बदलाव के प्रभाव को कम कर महिलाएं 40 की उम्र के बाद भी बिंदास जिंदगी जी सकतीं हैं। उन्होंने सलाह दी की 40 की उम्र के बाद एरोबिक के बजाय योग करें और मीनोपॉज के बाद बिंदास जिंदगी जीने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 40 के बाद महिलाओं की जिंदगी खत्म नहीं होती, बल्कि एक नया अध्याय शुरू होता है। डॉ जयदीप मल्होत्रा

 

मीनोपॉज के हार्मोन असंतुलन के कारण होने वाले बदलाव

-चिड़चिड़ापन बढ़ जाना।

-नींद न आना।

-याद्दाश्त कमजोर होना।

-हड्डियों का कमजोर होना, बाल अधिक झड़ना।

-देखने व चबाने में दिक्कत महसूस होना।

-एजिंग का बढ़ना।

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