अस्थमा रोगी किशोरों के लिए मिला इलाज, खा सकेंगे आइसक्रीम

0

आगरा। किशारों में अस्थमा तेजी से बढ़ा है, इससे उनका स्कूल छूट रहा है। कम उम् में ही उनकी कार्यक्षमता कम हो रही है। इन्हेलर और नेबुलाइजर का इस्तेमाल करना पड रहा है। मगर अब अस्थमा रोगी किशोरों को बीमारी से राहत मिल सकती है। किशोरों में अस्थमा के इलाज और रोकथाम पर पदमश्री डॉ पुखराज बापना, छत्तीसगढ ने रिसर्च की है।

डॉ पुखराज बापना ने बताया कि अस्थमा रोगी 80 किशोरों पर स्टडी की गई, इसमें से 40 किशोरों को सुबह एक घंटे योगा और शेष 40  को एक घंटे पीटी कराई गई। 4 महीने तक योगा और पीटी कराने के बाद किशोरों की अस्थमा के जांच की गई। जो किशोर योगा कर रहे थे, उसमें से 81 फीसद का अस्थमा ठीक हो गया। उनकी दवाएं बंद हो गईं।

डॉ पुखराज

पदमश्री डॉ पुखराज बापना, छत्तीसगढ की रिसर्च में योगा से अस्थमा हुआ नियंत्रित

वहीं, जिन किशोरों ने पीटी की थी उनमें से 20 फीसद किशोरों का अस्थमा नियंत्रित था। यही नहीं, योगा करने वाले किशोर आइसक्रीम खा सकते हैं और एसी में रह सकते हैं। मगर, उन्हें योगा नियमित करना होगा। इस तरह अस्थमा रोगी किशोर नियमित योगा कर अच्छी जिंदगी जी सकते हैं, उन्हें मौसम बदलने पर स्कूल से छुट्टी नहीं करनी होगी।

उनकी तबियत भी नहीं बिगडेगी जिससे हॉस्पिटल में भर्ती होना पडे। अस्थमा रोगी किशोरों के लिए यह फ्री इलाज है। उन्होंने बताया कि किशोरों में अस्थमा वंशानुगत, एलर्जी और तनाव से हो सकता है। योगा से तनाव और एलर्जिक अस्थमा में राहत मिलती है, अस्थमा के साथ ही मधुमेह और दिल के रोगियों के लिए भी योगा राहत दे सकता है।

डॉ पुखराज बापना को 2011 में पदमश्री से सम्मानित किया गया था। इनकी पुस्तक स्टेटस आॅफ ट्रेवल चाइल्ड हेल्थ इन इंडिया सुर्खियों में रही। ये छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 150 बच्चों को गोद लेकर उनकी पढाई, स्वास्थ्य, की देखभाल, करियर और शादी करा रहे हैं।

किशोरों की पीनल ग्लैंड सक्रिय रहे तो कम हो सकते हैं रेप और हिंसक प्रवत्ति

किशोरों में हिंसक प्रवत्ति के साथ रेप करने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उनका बचपन खो रहा है और कम उम्र में ही उनमें परिपक्वता आ रही है। डॉ पुखराज बापना ने बताया कि हमारे मस्तिष्क में पीनल ग्लैंड होती है। इस ग्रंथि की सक्रियता किशोरों में हिंसक प्रवृति, सेक्स, आक्रमकता जैसी मनोवृत्ति को रोकने में कारगर होती है।

इससे किशोरों का ध्यान गलत आदतों पर नहीं जाता था। पहले के समय में इस ग्रंथि के सक्रिय रहने की उम्र 15 से भी अधिक होती थी। मगर, अब तनाव और खानपान से पीनल ग्लैंड आठ साल की उम्र के बाद काम करना कम कर देती है। इससे किशोर हिंसक प्रवत्ति  के हो रहे हैं।

वे गलत काम कर रहे हैं, इससे कम उम्र में सेक्स और रेप की घटनाएं होने लगी हैं। इससे बचने के लिए आठ साल की उम्र के बाद किशोरों को श्याम भवी मुद्रा योग कराना चाहिए। यह मुद्रा पीनल ग्रंथि को अधिक उम्र तक सक्रिय रखती है। इससे किशोर की गलत आदतों पर नियंत्रण किया जा सकता है।

loading...
शेयर करें