जज ने कहा तलाक… तलाक…तलाक , पत्नी ने कोर्ट में की शिकायत

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इलाहाबाद। मुस्लिम समुदाय में तीन बार तलाक-तलाक-तलाक कहने की धार्मिक मान्यता को अपनाते हुए जज ने अपनी पत्नी को तलाक-तलाक-तलाक कह दिया तो पत्नी धार्मिक मान्यता से ऊपर उठकर अपनी शादी बचाने के लिए कोर्ट की शरण में पहुंच गई। अलीगढ़ जिले के अतिरिक्‍त जिला न्यायाधीश मोहम्‍मद जहीरूद्दीन सिद्दीकी (59) ने गुस्से में अपनी बीवी अफशा खान को तीन बार तलाक कह दिया। जज के इस व्यवहार से गुस्साई बेगम अफशा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश और इलाहबाद उच्च न्‍यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी।

तलाक

पत्नी ने की जेल की मांग

59 वर्षीय जिला न्यायाधीश मोहम्‍मद जहीरूद्दीन सिद्दीकी की 47 वर्षीय पत्नी अफशा ने अपनी याचिका में कहा है कि यह अन्याय है और इस अन्याय को ऐसे व्‍यक्ति ने किया है जिसे न्याय देने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। अफशा का आरोप है कि वह इस न्यायाधीश और उसके परिवार द्वारा अत्याचार की शिकार हुई थी। अफशा ने मांग की है कि समाज में सही संदेश देने के लिए उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया जाना चाहिए।

शरीयत के अनुसार दिया तलाक

पत्नी को मौखिक रुप से दिये तलाक के संबध में न्यायाधीश मोहम्‍मद जहीरूद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि पत्नी के तरफ से हो रहे अत्याचार को लेकर हम तमाम कोशिशों के बावजूद समझौते तक नहीं पहुंच सकें इसलिए हमने शरीयत के अनुसार, उसे तलाक दे दिया। पिछले साल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि तीन बार तलाक बोलने की इस प्रणाली में बदलाव की गुंजाइश नहीं है। कुछ मुस्लिम संगठनों की इस सलाह को भी खारिज कर दिया गया था कि तलाक को अंतिम रूप देने से पहले तीन महीने का नोटिस देना अनिवार्य है। जानकारों का कहना है कि कुरान और हदीस के अनुसार तीन बार तलाक कहना अपराध है लेकिन अगर इसे बोलने की प्रक्रिया हो जाती है तो इसे पूरा माना जाएगा और बदला नहीं जा सकता। 1986 में राजीव गांधी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के शाहबानो के फैसले को पलटने के लिए एक कानून पारित किया था जिसमें मुस्लिम महिलाओं को आजीवन भत्ते का अधिकार दिया था।

एक साल पहले हुई थी शादी

अफशा का सिद्दीकी से निकाह 16 अगस्त, 2015 को अलीगढ़ के होटल पाम ट्री में हुआ था। अफशा ने पत्र में लिखा है मेरी शादी में परिवार के सभी सदस्य शामिल थे, जिसमें पति की पहली पत्नी से हुए बेटे भी शामिल थे। उसने यह भी आरोप लगाया है कि उसे धमकी दी गई थी। उसके अनुसार पति ने कहा था तुम मेरा स्टेटस जानती हो मैं कोई सामान्य आदमी नहीं हूं। इसलिए तुम आगे कोई कदम नहीं उठाओगी, वरना तुम, तुम्हारा भाई और अन्य परिवार के सदस्य परिणाम के लिए तैयार रहें।

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने की खुलासा

अलीगढ़ के न्यायाधीश से संबधित यह मामला तब प्रकाश में आया जब अफशा मुख्य न्यायाधीश और इलाहबाद उच्च न्यायालय को भेजे गए पत्रों के साथ एक मानवाधिकार कार्यकर्ता मारिया आलम उमर के पास जा पहुंची। उमर ने कहा कि इस महिला के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया है। मारिया आलम उमर न्यायाधीश की पत्नी को न्याय दिलाने के लिए आगे आए।

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