गुजरात पुलिस का खुलासा: तीस्ता के एनजीओ में हुआ करोड़ों का गबन

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नई दिल्‍ली। गुजरात पुलिस ने दावा किया है सोशल एक्टिविस्‍ट तीस्‍ता सीतलवाड़ के एनजीओ ने निजी जरूरतों के लिए फंड का इस्‍तेमाल किया है। इस कार्य में तीस्‍ता के पति भी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि तीस्‍ता के एनजीओ को करीब दस करोड़ का फंड दिया गया था।

तीस्‍ता के एनजीओ

तीस्‍ता के एनजीओ को लेकर उठ रहीं आवाजें

गुजरात पुलिस के दावे से पता चला है कि सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद ने मिलकर करीब 3.85 करोड़ रुपये का निजी इस्तेमाल किया है। पुलिस का कहना है कि उसके पास इस बात के दस्तावेजी सबूत हैं।

अंग्रेजी अखबार ने किया खुलासा

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार गुजरात पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर राहुल बी पटेल ने 83 पेज के हलफनामे में इस बात का ब्योरा दिया है कि इस मसले पर चल रही जांच में किस तरह से सीतलवाड़, उनके पति जावेद आनंद और उनके ट्रस्टों- सेंटर फॉर जस्ट‍िस ऐंड पीस (सीजेपी) तथा सबरंग- ने जरूरी दस्तावेज मुहैया करने में आनाकानी की। यह जांच गुलबर्ग सोसाइ‍टी के कुछ दंगा पीडि़तों की इस शिकायत के बाद शुरू की गई थी कि सीतलवाड़ दंपती दान मिलने के बाद उनकी मदद के लिए किए गए वादों से मुकर गए।

पुलिस ने की तीस्‍ता के एनजीओ के बैंक खातों की जांच

गुजरात पुलिस ने सीजेपी, सबरंग, तीस्ता और आनंद के 2007 से 2014 तक बैंक खातों की जांच की। पुलिस ने बताया कि इस दंपती के यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, मुंबई के खातों में 31 दिसंबर, 2002 तक कोई रकम नहीं थी, लेकिन जनवरी 2003 से दिसंबर 2013 के बीच आनंद ने इसमें 96.43 लाख और सीतलवाड़ ने 1.53 करोड़ रुपये डाले। इसके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा फरवरी 2011 से जुलाई 2012 के बीच मिले अनुदान से भी इस दंपती ने 1.40 करोड़ रुपये निजी जरूरतों के लिए खर्च किए। पुलिस के अनुसार सीतलवाड़ का यह दावा भी झूठा साबित हुआ है कि दंगों के ज्यादातर मुकदमे मुफ्त में लड़े गए हैं, ‘ दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि कई वकीलों को फीस के रूप में कुल करीब 71 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

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