दुर्घटना से ज्यादा दवाओं से हो रही मौत

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आगरा। अमेरिका में दुर्घटना से कहीं ज्यादा दवाओं से मौत हो रही है, यह आंकडे भारत में ज्यादा भयावह हो सकते हैं। मगर, यहां दवाओं के साइड इफेक्ट और उसके मरीजों पर हो रहे दुष्प्रभाव की मॉनीटरिंग नहीं हो रही है। होटल आईटीसी मुगल में इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ फार्माकोविजिलेंस की 16वीं एनुअल कांफ्रेंस में दवाओं की विजिलेंस पर गंभीरता से चर्चा की गई।

दवाओं

दवाओं का गलत इस्तेमाल हार्ट, किडनी, लिवर और ब्रेन पर असर डालती है

आयोजन समिति के चेयरमैन प्रो केसी सिंघल ने बताया कि दवाएं केमिकल सिंथेटिक कंपाउंड होते हैं। हर दवा का साइड इफेक्ट होता है, ऐसे में बीमारी, मरीज और दवा की एफीकेसी व उसके साइड इफेक्ट को ध्यान में रखते हुए डोज और कितने समय के लिए दवा देनी है यह तय होता है। मगर, भारत में तमाम ऐसी दवाएं हैं जो दुनिया भर में प्रतिबंधित है और उनका इस्तेमाल हो रहा है। इसी तरह झोलाछाप दवाओं का मिसयूज कर रहे हैं, इसलिए सामान्य बीमारियों में इलाज के बाद भी मौत हो रही हैं। मगर, इस पर निगरानी नहीं रखी जा रही है। ऐसा हो तो अमेरिका से कहीं ज्यादा मौते भारत में दवाओं से रिपोर्ट होंगी।

उन्होंने कहा कि अधिकांश दवाएं हार्ट, किडनी, लिवर और ब्रेन पर असर डालती हैं, इसे ध्यान में रखना चाहिए। कुछ दवाएं बोनमैरो को भी सप्रेस करती हैं। सिर दर्द सहित अन्य दर्द के लिए इस्तेमाल होने वाली एस्प्रिन से गैस्ट्रिक हेमरेज पेट में रक्तस्राव होने की आशंका रहती है, लेकिन यह एस्प्रिन की खोज के 52 साल बाद पता चल सका है।

डब्ल्यूएचओ करा रहा मॉनीटरिंग, भारत में रिपोर्टिंग का स्तर कमजोर 

1960 में गर्भवती महिलाओं को उल्टी और चक्कर आने पर थैलीडोमाइड का इस्तेमाल किया गया, इससे सिर्फ जर्मन में 10 हजार बच्चे सील की तरह पैदा हुए। इसके बाद दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद डब्ल्यूएचओ ने दवाओं पर निगरानी शुरू की गई। इसके लिए भारत में मुंबई और अलीगढ में एडवर्स ड्रग रिएक्शन (एडीआर)  सेंटर बनाए गए। इसके बाद सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने गाजियाबाद में सेंटर बनाया है, हर मेडिकल कॉलेज में एक यूनिट स्थापित की गई है। आईएमए से भी रिपोर्टिंग करने के लिए कहा गया है। इसमें दवाओं के इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट की रिपोर्टिंग डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और आम लोग कर सकते हैं। मगर, दुनिया में दूसरे नंबर की आबादी वाले भारत दवाओं के साइड इफेक्ट की रिपोर्टिंग में नीचे से दूसरे पायदान पर है।

सॉल्ट एक होने के बाद भी रेट अलग अलग 

प्रेसीडेंट प्रो गोविंद मोहन ने बताया कि दवाओं के तीन ग्रुप होते हैं, फार्मास्यूटिकल टेबल यह महंगी होती हैं, इस पर ज्यादा टैक्स होता है, ब्रांडेड जैनरिक इसका रेट कम और टैक्स भी कम होता है और जैनेरिक सबसे सस्ती होती हैं और रेट भी सबसे कम होता है। मगर, इन तीनों दवाओं में सॉल्ट एक ही होता है।

इन दवाओं के साइड इफेक्ट 

-निम्युसलाइड दर्द और बुखार के लिए बच्चों में विदेश में प्रतिबंधित, भारत में हो रही इस्तेमाल, लिवर खराब होने का खतरा

-क्लिंडामाइसिन एंटी बैक्टीरियल, टाइफाइड सहित अन्य बीमारियों में दी जाती है, बोन मैरो सप्रेस करती है

-एस्प्रिन दर्द की दवा, गैस्ट्रिक हेमरेज

-स्ट्रेप्टोमाइसिन एंटी बायोटिक, टीबी के मरीजों को दी जाती है, बहरापन होने का खतरा

 

 

 

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