दस दिन तक नजरबंद होने के बाद फिर हुई यासीन मलिक के गिरफ्तारी

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श्रीनगर। जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष मुहम्मद यासीन मलिक को रविवार को अनंतनाग जिले से हिरासत में ले लिया गया है। जेकेएलएफ सूत्रों ने बताया कि मलिक शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना देकर लौट रहे थे। घर लौटते वक्त उन्हें उनके दो सहयोगियों के साथ हिरासत में ले लिया गया।

मुहम्मद यासीन मलिक

खबरों के मुताबिक जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का चीफ यासीन मलिक को अनंतनाग जिले से हिरासत में लिया गया है।

JKLF के सूत्रों का कहना है कि यासीन मलिक कुछ परिजनों को सांत्वना देने गए थे, घर लौटते वक्त उन्हें और उनके दो साथियों को हिरासत में ले लिया गया। बता दें कि मलिक को 10 दिनों तक नजरबंद रखने के बाद शनिवार को ही रिहा किया गया था।

इससे पहले कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कहा था कि अगर केंद्र सरकार राज्य में नई सरकार के गठन के लिए उनकी पार्टी को तोड़ती है, तो फिर इससे राज्य में और ज्यादा सलाहुद्दीन और यासीन मलिक पैदा होंगे।

हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की दूसरी बरसी से पहले जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई थी। यासीन मलिक को पुलिस ने पांच जुलाई 2018 की सुबह उनके घर से हिरासत में ले लिया था।

यासीन को हिरासत मेें अलगाववादी खेमे द्वारा राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों की साजिश रचे जाने का संज्ञान लेते हुए हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए हुई थी।

उस वक्त पुलिस अधिकारी ने बताया कि मलिक को मैसूमा में उनके घर से हिरासत में लिया गया और उन्हें मैसूमा थाने में हवालात में रखा गया। जबकि हुर्रियत कांफ्रेंस के नरमपंथी धड़े के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक को उनके आवास पर नजरबंद किया गया था।

अलगाववादियों ने 8 जुलाई को घाटी में हड़ताल का आह्वान किया था। जो बेअसर रहा। कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया था। गौरतलब है कि सुरक्षाबलों ने अनंतनाग जिले के कोकरनाग में 8 जुलाई 2016 को बुरहान वानी को मार गिराया था।

बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ, साथ ही घाटी के कई युवाओं ने आंतक की राह पकड़ ली थी। लेकिन फिर भी सुरक्षाबलों और प्रशासन ने उनको वापस अमन और चैन के रास्ते पर लगाने का प्रयास किया।

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