दिल्ली हाईकोर्ट ने धनशोधन मामले में गिरफ्तार वकील को दी जमानत

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद हुए धन शोधन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किये गए वकील और अन्य आरोपी को दिल्ली हाईकोर्ट  ने गुरूवार को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने वकील रोहित टंडन व डाटा इंट्री ऑपरेटर राज कुमार गोयल को दो जमानतदारों के साथ 5 लाख रुपये के निजी मुलचके के बाद इन आरोपियों को जमानत दी।

इसके पहले आरोपियों ने निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की थी लेकिन अदालत ने इस याचिका को नामंजूर कर दिया था। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए ही उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों एक साल व चार महीने से ज्यादा समय से हिरासत में हैं और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद आरोपों पर अब तक बहस नहीं हुई है। टंडन को 28 दिसंबर 2016 को व गोयल को 9 जनवरी 2017 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मुकदमे में कुछ समय लग सकता है।

अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में साक्ष्य प्रारंभिक तौर पर दस्तावेजी प्रकृति के हैं और साक्ष्य में स्वीकार्य आरोपी के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। पुष्टिकर्ता साक्ष्य सीसीटीवी फुटेज के रूप में है और कॉल विवरण के रिकॉर्ड भी दस्तावेजी प्रकृति के हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि गोयल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विभिन्न खातों में पैसे डाले और अपने ग्राहकों से कमीशन लेकर लाभ कमाया। आरोप लगाया गया कि गोयल व उसके कुछ सहयोगियों ने कोटक महिंद्रा बैंक व आईसीआईसीआई बैंक नया बाजार, चांदनी चौक दिल्ली में बहुत से खाते खोले थे।

आरोप है कि सरकार द्वारा 8 नवंबर 2016 को 500 व 1000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा करने पर गोयल ने अपने सहयोगियों के साथ पुराने नोटों में काले धन को नए नोटों में बदलने की साजिश रची और भारी मुनाफा कमाया।

बता दें कि काले धन की जांच के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई छापेमारी के बाद वकील को गिरफ्तार किया गया था। इस छापेमारी में टंडन के लॉ फर्म से 13.6 करोड़ रुपये की कथित जब्ती हुई थी।

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