दिल्ली ब्लास्ट : पुलिस की लापरवाही की वजह से बच गया तारिक अहमद, आसानी से साबित हो सकता था जुर्म

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नई दिल्‍ली। दिल्‍ली सीरियल ब्‍लास्‍ट मामले में कोर्ट ने दस साल बाद फैसला सुनाया है। दिल्‍ली की अदालत ने तीन में से दो आरोपियों को बरी कर दिया है। वहीं एक आरोपी तारिक अहमद डार को दस साल की सजा सुनाई है। 2005 में दिवाली से एक दिन पहले हुई इस घटना में 60 लोगों की मौत हुई थी। आरोपियों के बरी करने के पीछे कोर्ट ने सीदे-सीधे पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।

दिल्‍ली सीरियल ब्‍लास्‍ट

दिल्‍ली सीरियल ब्‍लास्‍ट मामले में पुलिस की लापरवाही की वजह से छूटे आरोपी

पटियाला हाउस स्थित एडिशनल सेशन जज रितेश सिंह की अदालत ने इस मामले में आरोपियों का संबंध वर्ष 2005 के सीरियल ब्लास्ट से होने को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस के पास पुख्ता साक्ष्यों का अभाव रहा। अदालत ने अपने फैसले में 9 ऐसे बिन्दुओं का जिक्र किया है, जिसमें पुलिस की नाकामयाबी साफ झलकती है। अदालत ने इन तथ्यों को प्रमुखता से लेते हुए कहा कि पुलिस की जांच प्रणाली बेहद लचर थी। इसी का नतीजा है कि पुलिस ने आरोपपत्र में जो भी इल्जाम लगाए, उन्हें साबित करने के लिए उनके पास साक्ष्य ही नहीं थे। कई ऐसे मौके आए जहां आरोपियों का संबंध सरोजनी नगर, पहाड़गंज व गोविॆदपुरी धमाकों से जोड़ा जा सकता था, लेकिन पुलिस ऐसा कर पाने में नाकामयाब रही।

इन तथ्यों को कोर्ट में साबित नहीं कर पाई पुलिस

  • दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र में दावा किया था कि डार ने सेटेलाइट के माध्यम से अबु अल्कामा से 230 बार बात की थी। इसके लिए डार ने एक मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। जांच में यह फोन किसी खुर्शीद आलम के नाम जारी किया गया था। लेकिन, पुलिस इस शख्स को लताशने में नाकाम रही। 
  • दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र में कहा था कि आरोपी मोहम्मद रफीक शाह ने 29 अक्तूबर 2005 को गोविंदपुरी में डीटीसी बस में बम रखा था, लेकिन पुलिस ने अदालत में कोई चश्मदीद गवाह पेश नहीं किया। पुलिस यह प्रमाणित करने में भी असफल रही कि बस में चार लड़के थे, जिन्हें शाह ने वापस आने को कहा था।
  • अबु अल्कामा से उसकी बातचीत की पुष्टि के लिए पुलिस ने तारिक अहमद डार की आवाज का नमूना लिया था, लेकिन इस नमूने को जांच के लिए सीएफएसएल भेजा गया। परन्तु आरोपी की आवाज का नमूना लेने के लिए औपचारिक आवेदन भी नहीं किया गया। कई लापरवाही की गई।
  • पुलिस का दावा था कि तारिक अहमद डार 4 अक्तूबर 2005 को दो और लोगों के साथ होटल त्रिभुवन पैलेस में ठहरा था। पुलिस ने होटल स्टाफ को गवाह बनाया था। पुलिस ने इस कर्मचारी को अदालत बुला लिया। परन्तु जब आरोपियों की पहचान की बारी आई तो इस गवाह को पेश नहीं किया गया।

13 सालों से जेल में बंद है तारिक

दिल्‍ली की अदालत ने दिल्‍ली सीरियल ब्‍लास्‍ट में तारिक को 10 साल की सजा इसलिए सुनाई है क्‍योंकि वह पिछले 13 साल से जेल में बंद है। 29 अक्टूबर को हुई इस वारदात से जहां 60 लोगों की मौत हो गई थी वहीं 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इन धमाकों के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा का हाथ था। 

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