मोबाइल पर ज्यादा बतियाते हैं तो आने वाले हैं बुरे दिन!

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नयी दिल्ली। अगर आप मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं और ज्‍यादातर समय उससे चिपके रहते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी बुरी हो सकती है, क्‍योंकि दूरसंचार कंपनियां ग्राहकों से ऊंची शुल्क दरें वसूलने की योजना बना रही हैं। दूरसंचार उद्योग के संगठन सीओएआई ने कहा है कि वित्त विधेयक 2016 में स्पेक्ट्रम आवंटन को सेवाओं के दायरे में लाए जाने से दूरसंचार कंपनियों पर 77,000 करोड़ रुपए का कर बोझ बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर इस बोझ को उपभोक्ताओं पर डाला गया तो ग्राहकों को दूरसंचार कंपनियों को ऊंची शुल्क दरें चुकानी पड़ सकतीं हैं।

 
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दूरसंचार कंपनियों के कदम से डिजिटल इंडिया कार्यक्रम होगा प्रभावित

सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने आगे कहा कि इस कदम का सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम और वित्तीय समावेश योजना पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उद्योग ने सरकार से इन कर प्रस्तावों पर पुनर्विचार करने और प्रस्तावित आयकर प्रावधान के बारे में स्पष्टीकरण देने को भी कहा है।

वित्त विधेयक 2016 में स्पेक्ट्रम आवंटन और उसके बाद उसके हस्तांतरण को वित्त अधिनियम 1994 की धारा 66ई के तहत सेवा घोषित किया जाता है। इसमें कहा गया है कि सभी सरकारी सेवाओं को सेवाकर के योग्य बनाया जाता है और सेवाएं लेने वाले को एक अप्रैल 2016 से इनका भुगतान करना होगा। सीओएआई ने कहा है कि अगर इस बोझ को ग्राहक पर डाला गया तो न केवल टेलीफोन सेवाएं महंगी होंगी बल्कि सरकार की डिजिटल इंडिया पहल पर भी बुरा असर पड़ेगा।

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